विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय मत: बैठकर जप = सर्वोत्तम। लेटकर जप = सामान्यतः अनुशंसित नहीं।
कारण
- 1बैठकर जप = एकाग्रता, रीढ़ सीधी = ऊर्जा प्रवाह सही।
- 2लेटकर = नींद आने की संभावना, एकाग्रता कम।
- 3शास्त्र: जप आसन पर बैठकर — सुखासन, पद्मासन, वज्रासन।
अपवाद (लेटकर मान्य)
- 1रोगी/वृद्ध: जो बैठ नहीं सकते — लेटकर मानसिक जप मान्य।
- 2गर्भवती: शारीरिक कठिनाई में लेटकर जप।
- 3सोने से पूर्व: बिस्तर पर लेटकर 'राम' या 'ॐ' जप = शांत निद्रा, शुभ। यह 'साधना' नहीं, भक्ति/प्रार्थना है।
कठोर दोष नहीं
शास्त्रों में लेटकर जप को 'महादोष' नहीं कहा — केवल कम प्रभावी। भक्ति भाव सर्वोपरि।
सार: बैठकर > लेटकर। असमर्थ हों तो लेटकर भी मान्य। सोने से पूर्व 'राम नाम' = शुभ। जप न छूटे = सबसे महत्वपूर्ण।





