विस्तृत उत्तर
अष्ट सिद्धि (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व) योग और मंत्र शास्त्र की उच्चतम उपलब्धियां हैं।
शास्त्रीय
- ▸पतंजलि (3.45): 'अणिमादि' सिद्धियां शरीर की जय से प्राप्त।
- ▸शिव पुराण: सिद्धिदात्री माता से शिव ने अष्ट सिद्धि प्राप्त की।
विधान
- 1गुरु अनिवार्य — बिना सिद्ध गुरु अष्ट सिद्धि = असंभव।
- 2वर्षों/दशकों की गहन साधना — रातोंरात नहीं।
- 3पूर्ण ब्रह्मचर्य, त्याग, एकांत।
- 4विशिष्ट मंत्र + विशिष्ट विधि = गुरुमुखी (सार्वजनिक नहीं)।
गीता (सावधानी): कृष्ण ने सिद्धियों के प्रति आसक्ति को चेतावनी दी — सिद्धि = मोक्ष मार्ग में बाधा हो सकती है। सिद्धि = साधन, साध्य नहीं।
पतंजलि (3.37): 'ते समाधावुपसर्गा' — ये सिद्धियां समाधि में बाधक हैं। सिद्धि आए तो अनासक्त रहें।
सामान्य भक्त: अष्ट सिद्धि = उच्चतम योगियों का विषय। सामान्य भक्तों का लक्ष्य = भक्ति, शांति, कल्याण, मोक्ष — सिद्धि नहीं।





