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मंत्र विधि📜 पतंजलि योग सूत्र, भगवद्गीता, योग शास्त्र2 मिनट पठन

मंत्र जप और ध्यान में क्या संबंध है?

संक्षिप्त उत्तर

पतंजलि: 'जप = अर्थ भावना सहित' → जप = ध्यान का साधन। क्रम: वाचिक → उपांशु → मानसिक → अजपा → ध्यान → समाधि। जप = मन की लगाम → मन शांत → स्वतः ध्यान। जप = प्रवेश द्वार, ध्यान = फल।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप और ध्यान गहरे रूप से जुड़े हैं — जप ध्यान का सोपान (सीढ़ी) है:

पतंजलि योग सूत्र

तज्जपस्तदर्थभावनम्' — मंत्र (ॐ) का जप उसके अर्थ के भावना (ध्यान) सहित करना चाहिए। अर्थात: जप = ध्यान का साधन, ध्यान = जप का लक्ष्य।

संबंध

  1. 1जप → धारणा → ध्यान → समाधि: पतंजलि के अष्टांग योग में — जप एकाग्रता (धारणा) लाता है → एकाग्रता गहरी = ध्यान → ध्यान गहरा = समाधि।
  2. 2जप = मन की लगाम: मन चंचल (बंदर) — मंत्र = लगाम। जप करते-करते मन शांत → स्वतः ध्यान।
  3. 3जप = ध्वनि ध्यान: मंत्र ध्वनि पर ध्यान = ध्यान का एक प्रकार (Mantra Meditation)।

क्रम

  • वाचिक जप (जोर से) → उपांशु (फुसफुसाकर) → मानसिक (मन में) → अजपा (स्वतः) → ध्यान (मंत्र लय, केवल भाव शेष) → समाधि

सार: जप = ध्यान का प्रवेश द्वार। ध्यान = जप का फल। दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू।

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शास्त्रीय स्रोत
पतंजलि योग सूत्र, भगवद्गीता, योग शास्त्र
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