विस्तृत उत्तर
सामान्य नियम: मंत्र जप के दौरान बीच में बोलना अनुशंसित नहीं — जप की धारा टूटती है।
यदि कोई बोले
- 1अत्यावश्यक हो: जप रोकें, बात करें, फिर मन शांत कर जप जारी रखें। गिनती जहां छूटी वहां से।
- 2अनावश्यक हो: संकेत (हाथ का इशारा) से बताएं कि जप में हैं — बाद में बात करें।
- 3मानसिक जप जारी रखें: बाहरी बातचीत + मन में जप = उन्नत साधकों का अभ्यास।
कठोर अनुष्ठान: विशेष अनुष्ठान (सवा लाख, अखंड जप) में बीच में बोलना वर्जित — मौन व्रत रखें।
सामान्य दैनिक जप: इतनी कठोरता आवश्यक नहीं। जप छूट जाए इसलिए अत्यधिक नियम न बनाएं — नियमितता > कठोरता।
सबसे अच्छा: जप का निश्चित समय और स्थान तय करें जहां बाधा न्यूनतम हो — प्रातःकाल सर्वोत्तम।





