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मंत्र विधि📜 विज्ञान भैरव तंत्र, उपनिषद, योग शास्त्र2 मिनट पठन

सोहम मंत्र का जप श्वास के साथ कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

'सो‌ऽहम्' = मैं वही ब्रह्म हूं। श्वास अंदर = 'सो', श्वास बाहर = 'हम्'। अजपा जप — 21,600 बार/दिन स्वतः। विज्ञान भैरव तंत्र: शिव→पार्वती। बिना माला, बिना दीक्षा, कहीं भी। सुखासन, मन में भाव, मुख बंद।

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विस्तृत उत्तर

सो‌ऽहम्' (सो = वह, अहम् = मैं) = 'मैं वही (ब्रह्म) हूं।' यह अजपा मंत्र है — बिना जपे स्वतः श्वास में चलता है।

श्वास से जप विधि

  1. 1सुखासन/पद्मासन में बैठें, रीढ़ सीधी।
  2. 2श्वास अंदर (पूरक): 'सो' ध्वनि — नाक से श्वास भीतर लेते हुए मन में 'सो' का भाव।
  3. 3श्वास बाहर (रेचक): 'हम्' ध्वनि — श्वास छोड़ते हुए मन में 'हम्' का भाव।
  4. 4यह चक्र निरंतर चलाएं — प्रत्येक श्वास = एक जप।
  5. 5मुख से कुछ न बोलें — केवल मन में भाव।

विशेषता

  • यह 'अजपा जप' है — 21,600 बार प्रतिदिन स्वतः होता है (मनुष्य की औसत श्वास संख्या)।
  • विज्ञान भैरव तंत्र: शिव ने पार्वती को यह विधि बताई।
  • बिना माला, बिना स्थान बंधन — कहीं भी, कभी भी।
  • बिना दीक्षा सभी कर सकते हैं।

उन्नत विधि: 'सो' = सहस्रार (ब्रह्म से ऊर्जा आना), 'हम्' = मूलाधार (अहं = व्यक्ति)। श्वास में ऊर्जा ऊपर से नीचे।

ध्यान रखें: प्रारंभ में 10-15 मिनट, फिर धीरे-धीरे बढ़ाएं। सोने से पहले करने से गहरी नींद।

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शास्त्रीय स्रोत
विज्ञान भैरव तंत्र, उपनिषद, योग शास्त्र
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