विस्तृत उत्तर
सोऽहम्' (सो = वह, अहम् = मैं) = 'मैं वही (ब्रह्म) हूं।' यह अजपा मंत्र है — बिना जपे स्वतः श्वास में चलता है।
श्वास से जप विधि
- 1सुखासन/पद्मासन में बैठें, रीढ़ सीधी।
- 2श्वास अंदर (पूरक): 'सो' ध्वनि — नाक से श्वास भीतर लेते हुए मन में 'सो' का भाव।
- 3श्वास बाहर (रेचक): 'हम्' ध्वनि — श्वास छोड़ते हुए मन में 'हम्' का भाव।
- 4यह चक्र निरंतर चलाएं — प्रत्येक श्वास = एक जप।
- 5मुख से कुछ न बोलें — केवल मन में भाव।
विशेषता
- ▸यह 'अजपा जप' है — 21,600 बार प्रतिदिन स्वतः होता है (मनुष्य की औसत श्वास संख्या)।
- ▸विज्ञान भैरव तंत्र: शिव ने पार्वती को यह विधि बताई।
- ▸बिना माला, बिना स्थान बंधन — कहीं भी, कभी भी।
- ▸बिना दीक्षा सभी कर सकते हैं।
उन्नत विधि: 'सो' = सहस्रार (ब्रह्म से ऊर्जा आना), 'हम्' = मूलाधार (अहं = व्यक्ति)। श्वास में ऊर्जा ऊपर से नीचे।
ध्यान रखें: प्रारंभ में 10-15 मिनट, फिर धीरे-धीरे बढ़ाएं। सोने से पहले करने से गहरी नींद।





