विस्तृत उत्तर
हां, यात्रा में मंत्र जप पूर्णतः मान्य और शुभ है।
शास्त्रीय आधार
- ▸नारद भक्ति सूत्र: नाम जप सदा, सर्वत्र, सभी अवस्थाओं में करना चाहिए।
- ▸'कलौ नामैव केवलम्' — कलियुग में नाम जप = कोई बंधन नहीं।
- ▸हनुमान जी ने लंका यात्रा में भी राम नाम जप किया।
यात्रा में जप कैसे करें
- 1मानसिक जप (सर्वोत्तम): मन ही मन 'ॐ नमः शिवाय', 'राम राम' — कहीं भी।
- 2माला जप: जेब में छोटी माला (27 मनके) रखें — हाथ जेब में।
- 3उंगलियों पर: माला न हो तो उंगलियों की गांठों पर गिनती।
- 4सुनकर: ईयरफोन से प्रामाणिक मंत्र सुनते हुए मन में जपें।
क्या नहीं करें
- ▸शौचालय/अशुद्ध स्थान में वाचिक जप (मानसिक चल सकता है)।
- ▸भोजन करते समय वाचिक जप (मानसिक मान्य)।
सार: यात्रा = जप छोड़ने का कारण नहीं। 'राम नाम' कहीं भी, कभी भी — कोई बंधन नहीं।





