विस्तृत उत्तर
'हंस' और 'सोहम' = एक ही मंत्र के दो रूप — अजपा मंत्र:
रहस्य
- 1'सो-हम' = श्वास अंदर 'सो', बाहर 'हम' = 'मैं वही (ब्रह्म) हूं।'
- 2'हं-स' = उल्टा — 'हम' + 'स' = 'हंस' = परमहंस = ब्रह्मज्ञानी।
- 3दोनों = एक ही अद्वैत सत्य — जीव = ब्रह्म।
गहरा रहस्य
- ▸21,600 श्वास/दिन = 21,600 बार 'सो-हम' जप स्वतः — अजपा जप (बिना जपे)।
- ▸विज्ञान भैरव तंत्र: शिव ने पार्वती को यह गोपनीय विधि बताई।
- ▸'सो' = 'सः' = वह (ब्रह्म), 'अहम्' = मैं। जीवात्मा = परमात्मा।
'हंस'
- ▸'हंसः सोऽहं, सोऽहं हंसः' — चक्रीय।
- ▸हंस = विवेक (दूध-पानी अलग) = ब्रह्म-माया विवेक।
- ▸परमहंस = जो 'सोऽहम्' सिद्ध कर ले = ब्रह्मज्ञानी (रामकृष्ण परमहंस)।
जप: श्वास अंदर = 'सो' (या 'हं'), श्वास बाहर = 'हम' (या 'स')। कहीं भी, कभी भी, बिना माला, बिना दीक्षा।





