दिशा: पूर्व=सामान्य, उत्तर=ज्ञान/मोक्ष, दक्षिण=पितृ। आसन: कुश=सर्वोत्तम (गीता 6.11), ऊनी कंबल, रेशम। खुली भूमि=वर्जित (ब्रह्माण्ड पुराण)। रंग: पीला=ज्ञान, लाल=शक्ति, काला=तांत्रिक, श्वेत=शांति।
- 1पूर्व: सर्वसामान्य, सर्वमान्य — सूर्योदय दिशा = ज्ञान, प्रकाश। अधिकांश जप।
- 2उत्तर: ज्ञान और मोक्ष हेतु — उत्तर = कुबेर (धन) + ध्रुव (स्थिरता)।
- 3दक्षिण: पितृ कर्म, तर्पण, श्राद्ध। कुछ तांत्रिक साधना।
- 4पश्चिम: कुछ विशेष ग्रह मंत्र (शनि)।
- 5कुश आसन: सर्वश्रेष्ठ — ऊर्जा संरक्षण, पाप शमन।
- 6ऊनी कंबल: सर्वसुलभ विकल्प।
- 7रेशमी वस्त्र: शुभ।
- 8लकड़ी की चौकी: मान्य।
- 9पीला: ज्ञान, विद्या, शांति।
- 10लाल: शक्ति, दुर्गा/काली/हनुमान।
- 11काला: भैरव, तांत्रिक।
- 12श्वेत: सरस्वती, शांति।