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वास्तु शास्त्र📜 वास्तु शास्त्र, आयुर्वेद परंपरा2 मिनट पठन

वास्तु के अनुसार घर में कौन सी दिशा में खाना खाएं

संक्षिप्त उत्तर

भोजन करते समय मुख पूर्व (सर्वोत्तम — पाचन) या उत्तर (समृद्धि) की ओर हो। भोजन कक्ष पश्चिम या रसोई के पास शुभ। बैठकर, शांत वातावरण में, भगवान को भोग लगाकर भोजन करें।

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विस्तृत उत्तर

वास्तु शास्त्र और आयुर्वेदिक परंपरा दोनों में भोजन की दिशा का महत्व बताया गया है।

भोजन करते समय मुख की दिशा

  1. 1पूर्व दिशा — सर्वोत्तम। सूर्य ऊर्जा पाचन शक्ति बढ़ाती है। स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए।
  2. 2उत्तर दिशा — धन और समृद्धि के लिए शुभ।
  3. 3पश्चिम दिशा — स्वीकार्य।
  4. 4दक्षिण दिशा — कुछ वास्तु विशेषज्ञ इसे अशुभ मानते हैं (यम की दिशा), परंतु यह सार्वभौमिक निषेध नहीं है।

भोजन कक्ष (Dining Area) की दिशा

  • पश्चिम — भोजन कक्ष के लिए उत्तम।
  • पूर्व या उत्तर — भी स्वीकार्य।
  • रसोई के पास — रसोई (आग्नेय) से सटा भोजन कक्ष व्यावहारिक और वास्तु अनुकूल।

भोजन के अन्य वास्तु/आयुर्वेदिक नियम

  • भोजन बैठकर करें, खड़े होकर या चलते हुए नहीं।
  • भोजन के समय शांत वातावरण हो — टीवी/मोबाइल से बचें।
  • भोजन से पहले भगवान को भोग/स्मरण अवश्य करें।
  • भोजन कक्ष में हल्के और गर्म रंग (हल्का पीला, क्रीम, हल्का नारंगी) शुभ।
  • शौचालय के सामने या पास बैठकर भोजन न करें।
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शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र, आयुर्वेद परंपरा
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