विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र और आयुर्वेदिक परंपरा दोनों में भोजन की दिशा का महत्व बताया गया है।
भोजन करते समय मुख की दिशा
- 1पूर्व दिशा — सर्वोत्तम। सूर्य ऊर्जा पाचन शक्ति बढ़ाती है। स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए।
- 2उत्तर दिशा — धन और समृद्धि के लिए शुभ।
- 3पश्चिम दिशा — स्वीकार्य।
- 4दक्षिण दिशा — कुछ वास्तु विशेषज्ञ इसे अशुभ मानते हैं (यम की दिशा), परंतु यह सार्वभौमिक निषेध नहीं है।
भोजन कक्ष (Dining Area) की दिशा
- ▸पश्चिम — भोजन कक्ष के लिए उत्तम।
- ▸पूर्व या उत्तर — भी स्वीकार्य।
- ▸रसोई के पास — रसोई (आग्नेय) से सटा भोजन कक्ष व्यावहारिक और वास्तु अनुकूल।
भोजन के अन्य वास्तु/आयुर्वेदिक नियम
- ▸भोजन बैठकर करें, खड़े होकर या चलते हुए नहीं।
- ▸भोजन के समय शांत वातावरण हो — टीवी/मोबाइल से बचें।
- ▸भोजन से पहले भगवान को भोग/स्मरण अवश्य करें।
- ▸भोजन कक्ष में हल्के और गर्म रंग (हल्का पीला, क्रीम, हल्का नारंगी) शुभ।
- ▸शौचालय के सामने या पास बैठकर भोजन न करें।





