विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र में जल स्रोत और जल भंडारण का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऊपरी (overhead) और भूमिगत (underground) टंकी के लिए नियम भिन्न हैं।
ऊपरी टंकी (Overhead Tank)
- 1नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) — सर्वोत्तम। यह दिशा भारी निर्माण के लिए उपयुक्त है और जल का भार यहां शुभ माना जाता है।
- 2पश्चिम या दक्षिण — स्वीकार्य विकल्प।
- 3ऊंचाई — दक्षिण-पश्चिम का भाग अन्य दिशाओं से ऊंचा होना वास्तु सिद्धांत है, अतः ऊपरी टंकी यहां तर्कसंगत है।
भूमिगत टंकी (Underground Tank)
- 1ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — सर्वोत्तम। ईशान कोण जल तत्व की दिशा है। भूमिगत जल स्रोत (बोरवेल, कुआं, टैंक) इसी दिशा में होना चाहिए।
- 2उत्तर दिशा — स्वीकार्य विकल्प।
कहां न बनाएं
- ▸ईशान कोण में ऊपरी टंकी — वर्जित। ईशान कोण हल्का और खुला होना चाहिए; भारी टंकी यहां ऊपर रखना गंभीर दोष है।
- ▸नैऋत्य में भूमिगत टंकी — अशुभ। यह दिशा ठोस और भारी होनी चाहिए, खुदाई नहीं।
- ▸ब्रह्म स्थान (केंद्र) में — किसी भी प्रकार की टंकी केंद्र में नहीं।
- ▸आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में — अग्नि तत्व क्षेत्र, जल विरोधी।
व्यावहारिक संक्षेप
- ▸ऊपरी टंकी → दक्षिण-पश्चिम (ऊंचा भाग)
- ▸भूमिगत टंकी → उत्तर-पूर्व (नीचा भाग)
- ▸यह नियम प्राकृतिक जल प्रवाह और भूमि ढलान के सिद्धांत पर आधारित है।





