विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र में दर्पण को ऊर्जा को परावर्तित और गुणित करने वाली वस्तु माना गया है। सही दिशा में लगा दर्पण सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है, जबकि गलत दिशा में लगा दर्पण नकारात्मकता बढ़ा सकता है।
सही दिशा: वास्तु में दर्पण लगाने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार सर्वोत्तम मानी गई है। पूर्व और उत्तर से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और दर्पण इसे और बढ़ाता है।
गलत दिशाएँ: दक्षिण और पश्चिम की दीवारों पर दर्पण नहीं लगाना चाहिए। दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है और यहाँ दर्पण लगाने से घर की सकारात्मक ऊर्जा बाहर की ओर परावर्तित होती है, जिससे आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव बढ़ता है।
बेडरूम नियम: बेडरूम में बिस्तर के ठीक सामने दर्पण नहीं होना चाहिए। सोते समय शरीर का प्रतिबिंब दर्पण में दिखने से दाम्पत्य जीवन में मतभेद, विश्वास की कमी और थकान बढ़ती है।
आकार और गुणवत्ता: दर्पण हमेशा आयताकार या चौकोर होना चाहिए। गोल, अण्डाकार या अनियमित आकार का दर्पण वास्तु दोष पैदा करता है। टूटा, धुंधला या खंडित दर्पण तुरंत बदल देना चाहिए।
ऊँचाई: दर्पण जमीन से कम से कम 4-5 फीट की ऊँचाई पर लगाना चाहिए। दो दर्पण एक-दूसरे के ठीक सामने नहीं होने चाहिए। तिजोरी या अलमारी के सामने दर्पण लगाने से धन में वृद्धि होती है।





