विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र में रंगों का घर की ऊर्जा और वहाँ रहने वाले लोगों के जीवन पर गहरा प्रभाव माना गया है। लाल रंग अग्नि तत्व, शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है।
वास्तु के अनुसार लाल रंग दक्षिण दिशा का रंग है। यदि घर का कोई कमरा दक्षिण दिशा में है तो उसकी दीवार पर लाल या नारंगी रंग करवाना उपयुक्त माना गया है।
रसोई के लिए लाल या नारंगी रंग अच्छा माना जाता है क्योंकि रसोई दक्षिण-पूर्व दिशा में होती है जो अग्नि तत्व की दिशा है। लाल रंग इस दिशा की ऊर्जा को बढ़ाता है।
बेडरूम में लाल रंग नहीं करवाना चाहिए। यह अग्नि तत्व का रंग है और शयन कक्ष में इससे नींद में खलल पड़ता है, मानसिक उत्तेजना बढ़ती है और पति-पत्नी में कलह का कारण बन सकता है।
उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में लाल या नारंगी रंग कभी नहीं करना चाहिए। यह जल तत्व की दिशा है और लाल रंग (अग्नि) का यहाँ प्रयोग तत्वों में असंतुलन पैदा करता है।
पूजा घर में भी लाल रंग का हल्का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन पीला या नारंगी अधिक उपयुक्त माना जाता है। बच्चों के प्लेरूम में लाल का हल्का प्रयोग हो सकता है लेकिन स्टडी रूम में नहीं।





