विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र में घर के एकदम मध्य भाग को 'ब्रह्मस्थान' कहा जाता है। यह वास्तुपुरुष की नाभि का स्थान है और पूरे भवन की ऊर्जा का केंद्र बिंदु माना जाता है। वृहत्संहिता में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि जो गृहस्वामी खुशहाली चाहते हैं, वे ब्रह्मस्थान को अत्यंत सुरक्षित रखें।
ब्रह्मस्थान को खाली रखना इसलिए जरूरी है क्योंकि यही वह स्थान है जहाँ से सभी दिशाओं से आने वाली सकारात्मक प्राण ऊर्जा एकत्रित होती है और पूरे घर में वितरित होती है। जिस प्रकार शरीर का नाभि स्थान सारे शरीर से जुड़ा होता है, उसी प्रकार ब्रह्मस्थान से पूरे घर में ऊर्जा का प्रवाह होता है।
यदि इस स्थान पर भारी सामान, दीवार, खंभा, सीढ़ी, शौचालय, रसोई या कूड़ा रखा जाए तो ऊर्जा का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। इसके दुष्प्रभाव से घर में आर्थिक समस्याएँ, स्वास्थ्य परेशानियाँ, पारिवारिक कलह और मानसिक अशांति बढ़ती है।
ब्रह्मस्थान को खाली रखने के साथ यह भी सुनिश्चित करें कि यह स्थान थोड़ा ऊँचा और साफ हो। यहाँ गड्ढा नहीं होना चाहिए। नियमित रूप से यहाँ धूप-दीप जलाना और तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो इस स्थान पर तांबे के पात्र में जल रखें।





