विस्तृत उत्तर
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) को वास्तु शास्त्र में सबसे पवित्र और ऊर्जावान दिशा माना जाता है। मयमतम् और बृहत् संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस दिशा के स्वामी ईश्वर (शिव) और जल तत्व बताए गए हैं।
ईशान कोण में क्या रखें
- 1पूजा स्थल/मंदिर — पूजा घर के लिए ईशान कोण सर्वश्रेष्ठ स्थान है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह पूरे घर में होता है।
- 1जल स्रोत — ईशान कोण जल तत्व का प्रतिनिधि है। यहाँ पानी का कलश, जल पात्र या छोटा फाउंटेन रखना शुभ है। भूमिगत जल टैंक या बोरवेल के लिए भी यह दिशा उत्तम है।
- 1तुलसी का पौधा — तुलसी वृंदावन ईशान कोण में अत्यंत शुभ माना जाता है।
- 1स्वच्छ और खुला स्थान — ईशान कोण यथासंभव खुला, स्वच्छ और हल्का रखें। यहाँ फर्श का स्तर अन्य भागों से नीचा होना शुभ है।
ईशान कोण में क्या न रखें
- 1शौचालय/बाथरूम — यह सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है।
- 2कूड़ादान या गंदगी — अशुद्ध वस्तुएं इस दिशा में कदापि न रखें।
- 3भारी सामान/अलमारी — भारी फर्नीचर या स्टोर रूम न बनाएं।
- 4रसोई/अग्नि स्रोत — अग्नि तत्व इस जल तत्व दिशा से विरोध करता है।
- 5सीढ़ियां — ईशान कोण में सीढ़ियां अशुभ मानी जाती हैं।
- 6जूते-चप्पल — इस दिशा में जूते रखना अशुभ है।
व्यावहारिक सुझाव
- ▸ईशान कोण में पर्याप्त प्रकाश और वायु-संचार रखें।
- ▸इस दिशा में दीवार का रंग हल्का (सफेद, हल्का नीला, क्रीम) रखें।
- ▸नियमित रूप से गंगाजल का छिड़काव करें।
- ▸यदि वास्तु दोष है तो ईशान कोण में क्रिस्टल बॉल या पानी से भरा कलश रखने की सलाह दी जाती है।





