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वास्तु शास्त्र प्रश्नोत्तर — 64 प्रश्न

वास्तु शास्त्र से जुड़े 64 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 64 प्रश्न

वास्तु में नीले रंग का प्रयोग कब करें

पश्चिम दिशा के कमरे, बाथरूम, स्टडी रूम और बेडरूम में हल्का नीला रंग शुभ है। रसोई में नीला न करें। शांति, एकाग्रता और मानसिक सुकून के लिए उपयुक्त।

वास्तुनीला रंगदिशा
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वास्तु में घर का केंद्र बिंदु खाली रखना क्यों जरूरी

ब्रह्मस्थान पूरे घर की ऊर्जा का केंद्र है। खाली रखने से प्राण ऊर्जा सभी दिशाओं में प्रवाहित होती है। भारी सामान या निर्माण यहाँ करने से आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं।

वास्तुब्रह्मस्थानकेंद्र
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वास्तु में दर्पण लगाने के नियम कौन से हैं

दर्पण उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर लगाएँ। दक्षिण और पश्चिम में न लगाएँ। बेडरूम में बिस्तर के सामने न हो। आयताकार/चौकोर आकार शुभ, टूटा दर्पण तुरंत बदलें।

वास्तुदर्पणआईना
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वास्तु में लाल रंग की दीवार किस कमरे में बनाएं

दक्षिण दिशा के कमरे और रसोई में लाल रंग उपयुक्त है। बेडरूम, ईशान कोण और बच्चों के स्टडी रूम में लाल रंग न करवाएँ। लाल रंग अग्नि तत्व का प्रतीक है।

वास्तुलाल रंगदीवार
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वास्तु में गोल आकार का कमरा शुभ है या अशुभ

गोल आकार का कमरा आवासीय प्रयोजन के लिए अशुभ है। ऊर्जा असंतुलन और मानसिक अस्थिरता होती है। वर्गाकार और आयताकार आकार सर्वोत्तम हैं। सार्वजनिक भवनों में गोल आकार स्वीकार्य।

वास्तुगोल कमराआकार
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पूजा घर में संगमरमर का फर्श शुभ है या ग्रेनाइट

प्राकृतिक सफेद संगमरमर पूजा घर के लिए शुभ है। ग्रेनाइट भी उपयुक्त है। लकड़ी का मंदिर सर्वोत्तम। सिंथेटिक पत्थर से बचें। हल्के रंग का फर्श रखें।

वास्तुपूजा घरसंगमरमर
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घर में उत्तर पूर्व (ईशान) कोने में पानी रखने से क्या वास्तु लाभ होता है?

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) जल तत्व की दिशा है। यहाँ पानी का कलश, मटका या छोटा फव्वारा रखने से धन-वृद्धि, मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। भारी टंकी ऊपर न रखें।

ईशान कोणउत्तर पूर्ववास्तु
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वास्तु के अनुसार किस दिशा में बैठकर पढ़ाई करें बच्चे

पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की ओर मुँह करके पढ़ाई करें। स्टडी रूम उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में हो। दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके पढ़ाई न करें।

वास्तुपढ़ाईस्टडी रूम
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दुकान के मुख्य द्वार पर क्या लगाएं वास्तु के अनुसार

दुकान द्वार पर स्वस्तिक, ॐ, गणेश-लक्ष्मी, शुभ-लाभ, आम पत्तों का तोरण, और घंटी लगाएं। दीपावली पर लक्ष्मी पदचिह्न बनाएं। नकारात्मक चित्र, टूटा शीशा और काली सजावट वर्जित। द्वार स्वच्छ और प्रकाशित रखें।

दुकानमुख्य द्वारशुभ चिह्न
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गृह शांति पूजा कितने दिन में करनी चाहिए नए घर में

गृह शांति पूजा गृह प्रवेश के दिन या उससे 1-2 दिन पहले करें। लघु पूजा 1 दिन (3-4 घंटे), विस्तृत 1 पूरा दिन, गंभीर दोष निवारण 3-9 दिन। इसमें गणपति पूजन, नवग्रह, वास्तु पुरुष पूजन और हवन शामिल होता है।

गृह शांतिनया घरपूजा
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फैक्ट्री में वास्तु दोष निवारण कैसे करें

फैक्ट्री वास्तु: द्वार पूर्व/उत्तर, मालिक नैऋत्य में, भारी मशीनें दक्षिण-पश्चिम में, तैयार माल वायव्य (शीघ्र बिक्री), अग्नि स्रोत आग्नेय, जल ईशान में। बिना तोड़-फोड़: स्वस्तिक, यंत्र, हवन, ईशान में जल, सफाई-व्यवस्था बनाएं।

फैक्ट्रीवास्तुऔद्योगिक वास्तु
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दफ्तर में वास्तु के अनुसार कैसे बैठें कार्य सफलता

मुख पूर्व (ऊर्जा) या उत्तर (बुद्धि), पीठ ठोस दीवार। दरवाजा दिखना चाहिए। डेस्क पर कंप्यूटर आग्नेय में, जल ईशान में। डेस्क स्वच्छ-व्यवस्थित। बीम/शौचालय दीवार से दूर। कैक्टस न रखें।

दफ्तरबैठककार्य सफलता
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वास्तु के अनुसार घर में कौन सी दिशा में खाना खाएं

भोजन करते समय मुख पूर्व (सर्वोत्तम — पाचन) या उत्तर (समृद्धि) की ओर हो। भोजन कक्ष पश्चिम या रसोई के पास शुभ। बैठकर, शांत वातावरण में, भगवान को भोग लगाकर भोजन करें।

भोजनदिशाभोजन कक्ष
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घर में हवन करने से वास्तु दोष दूर होता है क्या

हाँ, हवन से वास्तु दोष कम होता है — वातावरण शुद्धि, ऊर्जा संतुलन और वास्तु मंत्रों का प्रभाव। आग्नेय कोण में वास्तु शांति मंत्रों से हवन करें। वर्ष में 1-2 बार अवश्य। परंतु गंभीर संरचनात्मक दोष के लिए हवन पर्याप्त नहीं — भौतिक सुधार भी आवश्यक।

हवनवास्तु दोषअग्निहोत्र
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वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी की टंकी कहाँ होनी चाहिए

ऊपरी टंकी नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में और भूमिगत टंकी ईशान (उत्तर-पूर्व) में रखें। ईशान में ऊपरी टंकी और नैऋत्य में भूमिगत टंकी गंभीर दोष है। यह जल तत्व और भूमि ढलान के सिद्धांत पर आधारित है।

पानी की टंकीजलवास्तु
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वास्तु दोष दूर करने में नमक का क्या उपयोग है

सेंधा नमक कोनों में रखें (15-30 दिन बाद बदलें), पोंछे के पानी में डालें, नमक-पानी दोषित स्थान पर रखें। यह आधुनिक वास्तु उपाय है — प्राचीन शास्त्रों में नहीं। नमक नमी और जीवाणु अवशोषित करता है; 'ऊर्जा शोषण' अप्रमाणित है।

नमकवास्तु दोषशुद्धि
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वास्तु के अनुसार अंडरग्राउंड टैंक कहाँ बनवाएं

भूमिगत टैंक ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाएं — जल तत्व की दिशा। उत्तर/पूर्व भी स्वीकार्य। नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में कदापि नहीं। आयताकार/वर्गाकार, रिसाव-मुक्त और स्वच्छ रखें।

अंडरग्राउंड टैंकभूमिगतजल
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वास्तु पुरुष कौन है और वास्तु मंडल क्या है

वास्तु पुरुष भूमि का अधिष्ठाता देवता है जो औंधे मुख (सिर ईशान, पैर नैऋत्य) लेटा है। वास्तु मंडल 81 पद (9×9) का ग्रिड है जिसमें 45 देवता विभिन्न स्थानों पर विराजमान हैं — केंद्र में ब्रह्मा। इसी के आधार पर भवन निर्माण किया जाता है।

वास्तु पुरुषवास्तु मंडलमयमतम्
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वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ी किस दिशा में होनी चाहिए

सीढ़ी नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), दक्षिण या पश्चिम में हो। ईशान कोण में सीढ़ी सबसे बड़ा दोष। घुमाव clockwise, सीढ़ियां विषम संख्या में। सीढ़ी के नीचे पूजा स्थल या शयनकक्ष न बनाएं।

सीढ़ीदिशावास्तु
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दुकान में बिक्री बढ़ाने के लिए वास्तु उपाय क्या हैं

दुकान वास्तु: द्वार पूर्व/उत्तर में, बैठक नैऋत्य में (मुख उत्तर), गल्ला उत्तर की ओर खुले, स्वस्तिक-गणेश लगाएं, ईशान में जल, गल्ले पास श्री यंत्र। प्रथम ग्राहक मना न करें। व्यापार सफलता में वास्तु सहायक है, एकमात्र कारक नहीं।

दुकानबिक्रीव्यापार वास्तु
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वास्तु शास्त्र का वैज्ञानिक आधार क्या है

वास्तु के मूल सिद्धांत — सूर्य प्रकाश, वायु संचार, जल प्रवाह — वैज्ञानिक रूप से तर्कसंगत हैं। ये प्राचीन पर्यावरणीय ज्ञान पर आधारित हैं। परंतु यंत्र, पिरामिड, ऊर्जा शोषण जैसे आधुनिक वास्तु दावे वैज्ञानिक प्रमाणों से रहित हैं।

वास्तुविज्ञानवैज्ञानिक आधार
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पूजा घर के ऊपर शौचालय होने से क्या दोष लगता है

पूजा घर के ऊपर शौचालय अत्यंत गंभीर वास्तु दोष है — पवित्रता भंग, पूजा फल क्षीण, स्वास्थ्य-धन पर नकारात्मक प्रभाव। सर्वोत्तम उपाय: पूजा स्थल का स्थान बदलें। अन्यथा तांबे की प्लेट, वास्तु यंत्र, गंगाजल छिड़काव करें।

पूजा घरशौचालयवास्तु दोष
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ऑफिस में वास्तु के अनुसार बैठने की दिशा क्या हो

मालिक नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में बैठें, मुख उत्तर/पूर्व। कर्मचारी मुख उत्तर/पूर्व रखें। वित्त विभाग उत्तर में, मार्केटिंग वायव्य में। पीठ पीछे ठोस दीवार हो, बीम के नीचे न बैठें।

ऑफिसबैठने की दिशाकार्यालय वास्तु
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किराये के घर में वास्तु उपाय कैसे करें

किराये के घर में बिना तोड़-फोड़: फर्नीचर सही दिशा में रखें, ईशान कोण में जल/तुलसी, द्वार पर स्वस्तिक/दीपक, कोनों में नमक, शंख ध्वनि, शुभ रंग के पर्दे, और स्वच्छता बनाएं। घर लेने से पहले द्वार दिशा और शौचालय स्थिति अवश्य देखें।

किराये का घरवास्तु उपायबिना तोड़-फोड़
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वास्तु दोष से पारिवारिक कलह होता है क्या समाधान क्या

कलह के वास्तु उपाय: नैऋत्य कोण भारी-ऊंचा रखें, बेडरूम से शीशा हटाएं, कांटेदार पौधे बाहर करें, सुंदरकांड पाठ करें, शयनकक्ष में हल्का गुलाबी रंग। वास्तु सहायक है, मूल समाधान आपसी संवाद और समझ है।

वास्तु दोषपारिवारिक कलहशांति
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वास्तु पिरामिड कहाँ रखें और इसके क्या लाभ हैं

वास्तु पिरामिड आधुनिक वास्तु उपाय है — प्राचीन शास्त्रों में इसका उल्लेख नहीं है। ब्रह्म स्थान (घर के केंद्र) या दोषित क्षेत्र में रखें। वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। शास्त्रसम्मत उपाय चाहें तो हवन और यंत्र स्थापना बेहतर विकल्प हैं।

वास्तु पिरामिडऊर्जावास्तु उपाय
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वास्तु के अनुसार बच्चों का कमरा कहाँ होना चाहिए

बच्चों का कमरा पश्चिम (एकाग्रता), उत्तर (बुद्धि), या पूर्व (ऊर्जा) दिशा में बनाएं। नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में न बनाएं — वह माता-पिता के लिए है। पढ़ते समय मुख पूर्व/उत्तर, सोते समय सिर दक्षिण/पूर्व में हो।

बच्चों का कमरावास्तुदिशा
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वास्तु दोष से आर्थिक तंगी आती है क्या उपाय बताएं

आर्थिक तंगी के वास्तु उपाय: उत्तर दिशा खुली-स्वच्छ रखें, कुबेर यंत्र स्थापित करें, तिजोरी दक्षिण दीवार पर रखें (मुख उत्तर), जल रिसाव ठीक करें, बंद/टूटी वस्तुएं हटाएं, श्री यंत्र पूजें, शुक्रवार लक्ष्मी पूजा करें। वास्तु केवल सहायक उपाय है, व्यावहारिक प्रयास भी आवश्यक हैं।

वास्तु दोषआर्थिक समस्याधन
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घर में हवन कुंड बनाने की जगह कहाँ हो वास्तु में

हवन कुंड आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में बनाएं — यह अग्नि तत्व की दिशा है। खुले स्थान में, अच्छे वायु संचार वाली जगह पर रखें। ईशान कोण (जल तत्व) और शयनकक्ष में न बनाएं।

हवन कुंडअग्निकुंडवास्तु
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नए घर में सबसे पहले क्या लेकर प्रवेश करें

नए घर में सबसे पहले: जल कलश (स्वस्तिक सहित), जलता दीपक, अन्न पात्र, पवित्र ग्रंथ और दूध ले जाएं। गाय को पहले प्रवेश कराना सर्वाधिक शुभ है। दाहिने पैर से प्रवेश करें। खाली बर्तन या टूटी वस्तुएं न ले जाएं।

गृह प्रवेशशुभ सामग्रीपरंपरा
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वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में गैस किस दिशा में रखें

गैस/चूल्हा आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखें और खाना बनाते समय मुख पूर्व दिशा की ओर हो। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में गैस रखना सबसे बड़ा दोष है। सिंक और गैस साथ-साथ न रखें।

रसोईगैसअग्नि
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वास्तु दोष दूर करने के लिए कौन से पौधे लगाएं

शुभ पौधे: तुलसी (ईशान कोण), पीपल (बाहर), नीम (वायव्य), बांस (पूर्व), अशोक (प्रवेश द्वार), केला (ईशान), मनी प्लांट (आग्नेय)। कैक्टस, बोनसाई और सूखे पौधे वर्जित। तुलसी सर्वश्रेष्ठ वास्तु उपाय है।

वास्तुपौधेशुभ पौधे
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गृह प्रवेश में वास्तु पूजा कैसे करें विधि सहित

गृह प्रवेश विधि: शुभ मुहूर्त में गंगाजल से शुद्धि → गणपति पूजन → वास्तु पुरुष पूजन → नवग्रह पूजन → दिक्पाल पूजन → वास्तु शांति हवन → पूर्णाहुति → दाहिने पैर से प्रवेश → रसोई में दूध उबालना।

गृह प्रवेशवास्तु पूजाहवन
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घर बनाते समय नींव में क्या रखना चाहिए वास्तु अनुसार

नींव में नवरत्न/पंचरत्न, पंचधातु (सोना, चांदी, तांबा, पीतल, लोहा), नवधान्य, ताम्र पत्र (स्वस्तिक सहित), सिक्के और गंगाजल रखें। ईशान कोण से नींव आरंभ करें, गणपति पूजन और भूमि पूजन अवश्य करें।

नींवभूमि पूजनवास्तु
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भूमि पूजन में कौन से देवताओं की पूजा करें

भूमि पूजन में गणेश, भूमि देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष, अष्ट दिक्पाल (इंद्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान), नवग्रह, नाग देवता और विश्वकर्मा की पूजा करें। ईशान कोण से आरंभ करें।

भूमि पूजनवास्तु पुरुषनिर्माण
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वास्तु के अनुसार पढ़ाई करते समय मुख किस दिशा में हो

पढ़ाई करते समय मुख पूर्व (सर्वश्रेष्ठ — एकाग्रता) या उत्तर (बुद्धि — तर्कशक्ति) दिशा में हो। दक्षिण में पढ़ने से बचें (नींद/आलस्य)। पीठ पीछे ठोस दीवार हो और बाईं ओर से प्रकाश आए।

पढ़ाईदिशाएकाग्रता
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नवग्रह पूजा से वास्तु दोष का निवारण कैसे करें

वास्तु में प्रत्येक दिशा का स्वामी ग्रह है। दोषित दिशा के अनुसार उस ग्रह की शांति करें — जैसे ईशान दोष में गुरु शांति, दक्षिण दोष में मंगल शांति। नवग्रह पूजा/हवन योग्य पंडित से कराएं।

नवग्रहवास्तु दोषग्रह शांति
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वास्तु में शौचालय गलत दिशा में हो तो उपाय क्या है

ईशान कोण या पूजा स्थल के पास शौचालय गंभीर वास्तु दोष है। उपाय: दरवाजा हमेशा बंद रखें, सेंधा नमक रखें, वास्तु यंत्र लगाएं, शौचालय के बाहर पंचमुखी हनुमान चित्र लगाएं। संभव हो तो स्थान बदलना सर्वोत्तम उपाय है।

शौचालयवास्तु दोषउपाय
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घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक लगाने का क्या लाभ है

मुख्य द्वार पर स्वस्तिक लगाने से शुभ ऊर्जा का प्रवेश, विघ्न निवारण, लक्ष्मी आगमन और दृष्टि दोष से रक्षा होती है। कुमकुम/हल्दी से या तांबे का स्वस्तिक द्वार के दोनों ओर लगाएं। यह गणेश जी और कल्याण का प्रतीक है।

स्वस्तिकमुख्य द्वारशुभ चिह्न
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घर में तुलसी का पौधा किस दिशा में लगाएं

तुलसी उत्तर, पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में लगाएं। दक्षिण दिशा और शौचालय के पास वर्जित है। तुलसी वृंदावन (ऊँचा चबूतरा) बनाकर लगाएं, प्रतिदिन संध्या में दीपक जलाएं, और रविवार को तुलसी न तोड़ें।

तुलसीदिशावास्तु
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घर में नमक का पानी रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है क्या

लोक परंपरा और वास्तु उपचार पद्धति में नमक के पानी को नकारात्मक ऊर्जा शोषक माना जाता है। कांच के पात्र में सेंधा नमक का पानी कोनों में रखें और सप्ताह में बदलें। यह प्राचीन शास्त्रों में प्रत्यक्ष वर्णित नहीं है, मुख्यतः लोक परंपरा पर आधारित है।

नमकनकारात्मक ऊर्जावास्तु उपाय
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घर के ईशान कोण में क्या रखना चाहिए वास्तु के अनुसार

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में पूजा स्थल, जल कलश, तुलसी का पौधा रखें और इसे खुला व स्वच्छ रखें। शौचालय, भारी सामान, अग्नि स्रोत और कूड़ा कदापि न रखें। यह दिशा जल तत्व और ईश्वर की है।

ईशान कोणवास्तुपूजा स्थल
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घर में बंद घड़ी रखने से क्या नुकसान होता है

बंद/रुकी हुई घड़ी जीवन में ठहराव, नकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक अवरोध और प्रगति में रुकावट लाती है। तुरंत ठीक कराएं या घर से हटाएं। चलती घड़ी उत्तर/पूर्व दीवार पर लगाएं। यह आधुनिक वास्तु सिद्धांत है, प्राचीन ग्रंथों में नहीं है।

बंद घड़ीवास्तुनकारात्मक ऊर्जा
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घर में मनी प्लांट किस दिशा में लगाना शुभ है

मनी प्लांट दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण — शुक्र/धन की दिशा) या उत्तर (कुबेर) दिशा में लगाएं। बेल ऊपर बढ़ने दें, सूखने न दें, और हरे/नीले गमले में रखें। यह आधुनिक वास्तु उपाय है, प्राचीन शास्त्रों में इसका उल्लेख नहीं है।

मनी प्लांटवास्तुदिशा
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घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के उपाय क्या हैं

नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के प्रमुख उपाय: गुग्गुल/कपूर हवन, गंगाजल छिड़काव, शंख ध्वनि, तुलसी का पौधा, कोनों में नमक रखना, नियमित सफाई, और हनुमान चालीसा पाठ। गंभीर स्थिति में वास्तु शांति हवन कराएं।

नकारात्मक ऊर्जाशुद्धिवास्तु उपाय
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बेडरूम में बिस्तर किस दिशा में रखें सोते समय सिर किधर

दक्षिण दिशा में सिर करके सोना सर्वश्रेष्ठ है (दीर्घायु, गहरी नींद); पूर्व दूसरी सर्वोत्तम दिशा है (ज्ञान वृद्धि)। उत्तर में सिर करके सोना वर्जित है। बिस्तर दक्षिण/पश्चिम दीवार से सटाकर रखें, बीम के नीचे या दरवाजे की सीध में नहीं।

बेडरूमशयन दिशावास्तु
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घर में कैक्टस रखना चाहिए या नहीं वास्तु क्या कहता है

वास्तु के अनुसार घर के अंदर कैक्टस रखना अशुभ माना जाता है — यह तनाव, विवाद और नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। घर के बाहर या बाउंड्री पर रख सकते हैं। इसके स्थान पर तुलसी, मनी प्लांट या बांस लगाएं।

कैक्टसवास्तुकांटेदार पौधे
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उत्तर दिशा में सिर करके क्यों नहीं सोना चाहिए

उत्तर में सिर करके सोना वास्तु और आयुर्वेद दोनों में वर्जित है। पृथ्वी और शरीर के चुंबकीय ध्रुवों के विकर्षण से रक्तचाप, सिरदर्द और अनिद्रा हो सकती है। आयुर्वेदिक परंपरा में इसे आयु क्षीण करने वाला कहा गया है। दक्षिण या पूर्व दिशा उत्तम है।

उत्तर दिशाशयन निषेधवास्तु
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वास्तु दोष निवारण के लिए कौन से मंत्र जपें

वास्तु दोष निवारण के प्रमुख मंत्र: 'ॐ वास्तोष्पते प्रतिजानीह्यस्मान्...' (ऋग्वेद), महामृत्युंजय मंत्र, 'ॐ गं गणपतये नमः', और वास्तु शांति मंत्र। 108 बार जप, 40 दिन तक नियमित करने से विशेष लाभ होता है।

वास्तु दोषमंत्रनिवारण
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वास्तु अनुसार घर का मुख्य द्वार किस दिशा में होना चाहिए

वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व और उत्तर दिशा मुख्य द्वार के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। पूर्व सूर्य ऊर्जा के लिए और उत्तर धन-समृद्धि के लिए शुभ है। दक्षिण दिशा सामान्यतः अशुभ मानी जाती है परंतु पद विभाजन के अनुसार शुभ भी हो सकती है।

वास्तुमुख्य द्वारदिशा
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वास्तु शास्त्र — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर वास्तु शास्त्र श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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वास्तु शास्त्र को गहराई से समझने का तरीका

वास्तु शास्त्र प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

64 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।