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वास्तु शास्त्र📜 वास्तु शास्त्र, मयमतम्, समरांगण सूत्रधार2 मिनट पठन

वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ी किस दिशा में होनी चाहिए

संक्षिप्त उत्तर

सीढ़ी नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), दक्षिण या पश्चिम में हो। ईशान कोण में सीढ़ी सबसे बड़ा दोष। घुमाव clockwise, सीढ़ियां विषम संख्या में। सीढ़ी के नीचे पूजा स्थल या शयनकक्ष न बनाएं।

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विस्तृत उत्तर

सीढ़ी की दिशा और घुमाव वास्तु शास्त्र में महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करती है।

सीढ़ी की सर्वश्रेष्ठ दिशा

  1. 1नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) — सर्वोत्तम। यह भारी निर्माण की दिशा है।
  2. 2दक्षिण दिशा — दूसरा उत्तम विकल्प।
  3. 3पश्चिम दिशा — स्वीकार्य।

सीढ़ी कहां न हो

  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — सबसे बड़ा दोष। ईशान कोण खुला और हल्का होना चाहिए।
  • ब्रह्म स्थान (केंद्र) — घर के ठीक बीच में सीढ़ी अशुभ।
  • मुख्य द्वार के ठीक सामने — प्रवेश करते ही सामने सीढ़ी दिखना अशुभ माना जाता है।

सीढ़ी के नियम

  1. 1घुमाव — सीढ़ी का घुमाव दक्षिणावर्त (clockwise — बाएं से दाएं ऊपर) होना चाहिए।
  2. 2सीढ़ियों की संख्या — विषम (odd) संख्या शुभ मानी जाती है — जैसे 5, 7, 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21। कुछ परंपराओं में अंतिम सीढ़ी पर पैर बायां पड़ना शुभ माना जाता है।
  3. 3चौड़ाई — सीढ़ी संकरी न हो, पर्याप्त चौड़ी हो।
  4. 4टूटी सीढ़ियां — टूटी या दरार वाली सीढ़ियां तुरंत ठीक कराएं।
  5. 5सीढ़ी के नीचे — पूजा स्थल, रसोई या शयनकक्ष कदापि न बनाएं। सीढ़ी के नीचे स्टोर रूम बनाना स्वीकार्य है।
  6. 6अंधेरा — सीढ़ी में पर्याप्त प्रकाश हो, अंधेरी सीढ़ी अशुभ।

दोषपूर्ण सीढ़ी का उपाय

  • ईशान कोण में सीढ़ी है तो सीढ़ी के नीचे दीपक जलाएं, पौधा रखें।
  • सीढ़ी के प्रारंभ में गणेश जी का चित्र/मूर्ति लगाएं।
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शास्त्रीय स्रोत
वास्तु शास्त्र, मयमतम्, समरांगण सूत्रधार
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