विस्तृत उत्तर
मनी प्लांट (Epipremnum aureum / Pothos) को आधुनिक वास्तु उपचार पद्धति में धन-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। यह पौधा प्राचीन शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित नहीं है (क्योंकि यह मूलतः दक्षिण-पूर्व एशिया का पौधा है), परंतु आधुनिक वास्तु और फेंगशुई दोनों में इसे शुभ माना जाता है।
मनी प्लांट लगाने की सर्वश्रेष्ठ दिशा
- 1दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) — वास्तु में यह दिशा शुक्र ग्रह और धन-ऐश्वर्य से संबंधित है। मनी प्लांट के लिए सर्वाधिक शुभ दिशा यही मानी जाती है।
- 1उत्तर दिशा — कुबेर (धन देवता) की दिशा होने से यहां रखना भी शुभ है।
अन्य उपयुक्त स्थान
- ▸लिविंग रूम में — परिवार में सामंजस्य और समृद्धि।
- ▸बालकनी या खिड़की के पास — पर्याप्त अप्रत्यक्ष प्रकाश मिलता है।
कहां न रखें
- ▸रसोई में — अग्नि तत्व से विरोध माना जाता है।
- ▸बेडरूम में बिस्तर के पास — कुछ वास्तु विशेषज्ञ इसे नकारात्मक मानते हैं।
- ▸शौचालय में — अशुभ स्थान।
- ▸लाल या नारंगी गमले में — हरा या नीला गमला शुभ माना जाता है।
अन्य नियम
- 1मनी प्लांट सूखना या मुरझाना अशुभ माना जाता है — इसकी देखभाल करें।
- 2बेल नीचे की ओर न लटकने दें; ऊपर की ओर बढ़ने दें — यह समृद्धि में वृद्धि का प्रतीक है।
- 3किसी और का कटिंग लेकर लगाना शुभ माना जाता है — ऐसी लोक मान्यता है।
- 4पानी में भी उगा सकते हैं — हरे रंग की बोतल में पानी में रखना शुभ माना जाता है।
स्पष्टीकरण: मनी प्लांट से संबंधित अधिकांश वास्तु नियम आधुनिक वास्तु उपचार और फेंगशुई के प्रभाव से आए हैं, प्राचीन भारतीय वास्तु ग्रंथों में इसका उल्लेख नहीं मिलता।





