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यमलोक एवं न्याय प्रश्नोत्तर — 7 प्रश्न

यमलोक एवं न्याय से जुड़े 7 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 7 प्रश्न

यमलोक मार्ग पर अंधे कुएं और विकट पर्वत का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय में वर्णित है कि यममार्ग पर पापी अंधे कुएँ में गिरता है, विकट पर्वत से गिराया जाता है, छुरे की धार पर चलता है और जोंकों से भरे कीचड़ में पड़ता है — यह सत्रह दिन की अत्यंत कष्टमय यात्रा है।

यमलोक मार्गअंधा कुआँविकट पर्वत
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यमराज धनी और निर्धन से भेद नहीं करते — ऐसा क्यों?

गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में चित्रगुप्त कहते हैं — यमराज मूर्ख-पंडित, दरिद्र-धनवान, सबल-निर्बल — सभी से समान व्यवहार करते हैं क्योंकि यमलोक में केवल कर्म देखे जाते हैं, धन या पद नहीं।

यमराजनिष्पक्षताधनी निर्धन
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सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि और आकाश मनुष्य के कर्म क्यों जानते हैं?

गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय के अनुसार सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि, आकाश, भूमि, जल, हृदय और दोनों संध्याएँ — ये सभी मनुष्य के कर्मों के नित्य साक्षी हैं। साथ ही यमराज के गुप्तचर श्रवण भी सभी कर्म जानते हैं।

सूर्यचंद्रकर्म साक्षी
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यममार्ग पर रक्त की वृष्टि और शस्त्र की वृष्टि का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय के अनुसार यममार्ग पर पापियों पर रक्त, शस्त्र, अंगार, शिला और गर्म जल की वृष्टि होती है — यह उनके पाप-कर्मों का ही प्रतिफल है जो विभिन्न यातनाओं के रूप में लौटता है।

यममार्गरक्त वृष्टिशस्त्र वृष्टि
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यमराज का भैंसे पर बैठना क्यों बताया गया है?

गरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में यमराज भैंसे पर बैठे वर्णित हैं। भैंसा मृत्यु की अटल, निरपेक्ष और स्थूल शक्ति का प्रतीक है। काले रंग का भैंसा दक्षिण दिशा, यमलोक और अंधकार का प्रतीक है।

यमराजभैंसावाहन
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यममार्ग में पापी काले सर्पों और बिच्छुओं से क्यों घिरा होता है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय के अनुसार पापी के अपने पाप-कर्म ही यममार्ग में काले सर्पों, बिच्छुओं और हिंसक पशुओं का रूप धारण करते हैं। जिसने जितना कष्ट दिया, उसे उतनी ही पीड़ा के रूप में यह यातना मिलती है।

यममार्गकाले सर्पबिच्छू
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चित्रगुप्त पापियों को कौन से वचन सुनाते हैं?

गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय के अनुसार चित्रगुप्त पापियों को सुनाते हैं — 'तुम्हारे पाप ही तुम्हारे दुःख के कारण हैं, हम नहीं।' साथ ही यमदूत पूछते हैं कि दान, तीर्थ, देव-पूजन और हरिनाम जप क्यों नहीं किया।

चित्रगुप्तयमलोकपापी
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यमलोक एवं न्याय — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर यमलोक एवं न्याय श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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यमलोक एवं न्याय को गहराई से समझने का तरीका

यमलोक एवं न्याय प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

7 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।