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दर्शन एवं तत्त्वज्ञान प्रश्नोत्तर — 4 प्रश्न

दर्शन एवं तत्त्वज्ञान से जुड़े 4 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 4 प्रश्न

वैशेषिक दर्शन का परमाणु सिद्धांत

वैशेषिक दर्शन (महर्षि कणाद) के अनुसार सृष्टि पृथ्वी, जल, तेज और वायु के परमाणुओं से बनी है। ये परमाणु अविभाज्य और नित्य हैं। दो परमाणु → द्व्यणुक → त्र्यणुक → स्थूल द्रव्य। यह परमाणु सिद्धान्त आधुनिक विज्ञान से बहुत पहले प्रतिपादित हुआ।

वैशेषिक दर्शनपरमाणु सिद्धान्तमहर्षि कणाद
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न्याय दर्शन क्या है आसान भाषा में?

न्याय दर्शन महर्षि गौतम की देन है। यह तर्क और प्रमाण का शास्त्र है जो बताता है कि सत्य की परख कैसे करें। चार प्रमाण हैं — प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द। इसके अनुसार ज्ञान से मोक्ष प्राप्त होता है और ईश्वर सृष्टि का निमित्त कारण है।

न्याय दर्शनमहर्षि गौतमतर्कशास्त्र
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सांख्य दर्शन में प्रकृति और पुरुष

सांख्य में प्रकृति जड़ है (तीन गुणों की साम्यावस्था) और पुरुष चेतन। प्रकृति के विकार से सृष्टि बनती है। जब पुरुष प्रकृति के विकारों में स्वयं को मान लेता है — बन्धन होता है। तत्वज्ञान से 'मैं पुरुष हूँ, प्रकृति नहीं' — यह बोध मोक्ष देता है।

सांख्य दर्शनप्रकृतिपुरुष
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षड्दर्शन क्या हैं सनातन धर्म में?

षड्दर्शन वेद को प्रमाण मानने वाले छः आस्तिक दर्शन हैं — न्याय (गौतम), वैशेषिक (कणाद), सांख्य (कपिल), योग (पतंजलि), पूर्व मीमांसा (जैमिनि) और वेदान्त (व्यास)। ये सभी प्रमाण, आत्मा और मोक्ष को मानते हैं।

षड्दर्शनभारतीय दर्शनआस्तिक दर्शन
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दर्शन एवं तत्त्वज्ञान — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर दर्शन एवं तत्त्वज्ञान श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

विषय को सही क्रम से पढ़ें

दर्शन एवं तत्त्वज्ञान को गहराई से समझने का तरीका

दर्शन एवं तत्त्वज्ञान प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

4 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।