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देव कथा प्रश्नोत्तर — 10 प्रश्न

देव कथा से जुड़े 10 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 10 प्रश्न

हनुमान जी ने लंका क्यों जलाई — आध्यात्मिक अर्थ?

लंका=अहंकार(सोने का वैभव)। जलाना=अहंकार दहन। पूँछ=इंद्रियाँ। ज्ञान अग्नि=अज्ञान जलाती(गीता 4.37)। एक भक्त=पूरा साम्राज्य। भक्ति शक्ति=असीम।

हनुमानलंका दहनआध्यात्मिक
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कृष्ण को मक्खन प्रिय क्यों — आध्यात्मिक अर्थ?

दूध मथो=मक्खन(सार)। साधना=हृदय मंथन→भक्ति=मक्खन। शुद्ध+कोमल हृदय=कृष्ण निवास। चोरी=बिना माँगे हृदय चुराते। 'मक्खन नहीं, प्रेम चाहिए'—कृष्ण।

कृष्णमक्खनमाखन
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कृष्ण की बांसुरी का आध्यात्मिक अर्थ?

बांसुरी=खाली बांस=अहंकार शून्य→ईश्वर दिव्य संगीत बजाते। छेद=कष्ट(कष्ट बिना संगीत नहीं)। कृष्ण होंठ=निकटतम। ध्वनि=ईश्वर पुकार(गोपियाँ दौड़ीं)। खाली हो जाओ=कृष्ण बजाएंगे।

कृष्णबांसुरीवेणु
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कृष्ण को 56 भोग क्यों लगाते?

इंद्र वर्षा 7 दिन→कृष्ण गोवर्धन उठाया→56 प्रहर(7×8) भूखे। 56 प्रहर=56 भोग(प्रत्येक प्रहर 1 व्यंजन)। अन्नकूट=गोवर्धन पूजा। 56=त्याग का प्रतिदान।

कृष्ण56 भोगगोवर्धन
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हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाते — कथा?

सीता: 'राम आयु हेतु सिंदूर।' हनुमान: 'चुटकी=लाभ, तो पूरा शरीर=राम अमर!' पूरे शरीर पर लगाया। इसलिए मूर्ति सिंदूर लेपित। नारंगी सिंदूर+चमेली तेल(मंगलवार)। भोलेपन+परम भक्ति।

हनुमानसिंदूरसीता
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कृष्ण मोर पंख मुकुट क्यों पहनते?

कथा: मोर नाचे(बांसुरी)→पंख अर्पित→कृष्ण मुकुट धारण। पंख=ज्ञान नेत्र(Eye)। मोर=प्रेम(वर्षा नृत्य)। सोना नहीं=प्रकृति पंख=सादगी। प्रेम अर्पित=कृष्ण मुकुट पर।

कृष्णमोर पंखमुकुट
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कृष्ण ने सुदामा की गरीबी कैसे दूर की?

सुदामा=गरीब बालसखा, मुट्ठी चावल भेंट। कृष्ण ने खाए, बिना माँगे झोपड़ी→महल। 'माँगो मत, प्रेम दो=सब मिलेगा।' सच्ची मित्रता=धन नहीं देखती। मुट्ठी=करोड़ लौटे।

कृष्णसुदामामित्रता
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हनुमान जी को तेल क्यों चढ़ाते हैं?

कथा: लंका दहन→जलन→सीता ने तेल लगाया=तेल प्रिय। ब्रह्मचारी+पहलवान=तेल मालिश परंपरा। सिंदूर+तेल='चोला'=रक्षा कवच। चमेली तेल(मंगल)=सर्वोत्तम।

हनुमानतेलचमेली
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कृष्ण रास लीला का आध्यात्मिक अर्थ?

गोपी=जीवात्मा, कृष्ण=परमात्मा, रास=आत्मा-परमात्मा मिलन। प्रत्येक गोपी साथ=ईश्वर सबके+व्यक्तिगत। सब छोड़ना=पूर्ण समर्पण। विरह=भक्ति चरम। भागवत: कामदेव जीतने वाले=काम नाश।

कृष्णरास लीलागोपी
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हनुमान जी का पंचमुखी रूप कब प्रकट हुआ?

अहिरावण(रावण भाई) ने राम-लक्ष्मण पाताल ले गया। 5 दीपक बुझाने=5 मुख: वानर(पूर्व), नरसिंह(दक्षिण), गरुड़(पश्चिम), वराह(उत्तर), हयग्रीव(ऊर्ध्व)। अहिरावण वध। 5 दिशा रक्षा।

हनुमानपंचमुखीपाताल
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देव कथा — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर देव कथा श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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देव कथा को गहराई से समझने का तरीका

देव कथा प्रश्नोत्तर पेज छोटे उत्तरों को एक साथ रखता है, इसलिए इसे त्वरित समाधान और आगे पढ़ने के प्रवेश-द्वार दोनों की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

10 प्रश्न वाले इस पेज पर सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले वही प्रविष्टियाँ पढ़ें जो आपके वर्तमान सवाल से सीधा संबंध रखती हैं, फिर उनसे जुड़े अगले लेख या प्रश्न खोलें ताकि आधी-अधूरी जानकारी के बजाय पूरा संदर्भ बने।

अगर आपको किसी उत्तर का छोटा रूप मिल रहा है, तो उसी विषय के अगले प्रश्न और संबंधित विस्तृत लेख भी देखें। इससे नियम, अपवाद, समय, विधि और शास्त्रीय आधार जैसी बातें स्पष्ट होती हैं।

शुरुआत उन प्रश्न से करें जिनका शीर्षक आपके सवाल या उद्देश्य से सबसे अधिक मेल खाता है।

पढ़ते समय विधि, महत्व, समय और सावधानियों जैसे अलग-अलग पहलुओं को नोट करें, क्योंकि ये अक्सर अलग प्रविष्टियों में बँटे होते हैं।

अगर एक पेज से पूरा उत्तर न मिले, तो उसी संग्रह के अगले लेख या प्रश्न खोलकर संदर्भ पूरा करें।