विस्तृत उत्तर
कथा (verified): माता सीता मांग में सिंदूर लगा रही थीं। हनुमान ने पूछा — 'माता, यह क्यों लगाती हैं?' सीता बोलीं — 'प्रभु श्रीराम की लंबी आयु+स्वास्थ्य के लिए।'
हनुमान ने सोचा — एक चुटकी से इतना लाभ, तो पूरे शरीर पर लगाऊँ = प्रभु अमर! उन्होंने सारी अयोध्या का सिंदूर अपने पूरे शरीर पर लगा लिया। राम दरबार में आए = सभी हँसे, भरत रोए (भक्ति देख)।
इसलिए: हनुमान मूर्ति = सिंदूर लेपित। सिंदूर चढ़ाना = राम भक्ति + हनुमान कृपा। नारंगी सिंदूर + चमेली तेल = सर्वोत्तम (मंगलवार)।
गहरा अर्थ: हनुमान = भोलेपन+परम भक्ति = बच्चे जैसे — सब कुछ प्रभु के लिए।





