विस्तृत उत्तर
गणेश पूजा में तुलसी वर्जित — पौराणिक कथा:
कथा (ब्रह्मवैवर्त/पद्म पुराण)
तुलसी (वृंदा) ने गणेश को देखकर विवाह प्रस्ताव रखा। गणेश ने मना किया — वे ब्रह्मचारी थे। तुलसी ने क्रोधवश शाप दिया — 'तुम्हारा विवाह दो पत्नियों से होगा' (रिद्धि-सिद्धि)। गणेश ने प्रति-शाप दिया — 'तुम्हें कोई मेरी पूजा में अर्पित नहीं करेगा।'
अपवाद
- ▸गणेश अथर्वशीर्ष में तुलसी वर्जित।
- ▸किन्तु कुछ दक्षिण भारतीय परंपराओं में तुलसी मान्य — क्षेत्रीय भिन्नता।
- ▸विष्णु/कृष्ण पूजा = तुलसी अनिवार्य। गणेश = दूर्वा।
needs_review: कथा के कई versions — ब्रह्मवैवर्त पुराण reference सर्वमान्य नहीं।





