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गणेश व्रत📜 गणेश पुराण, व्रत परंपरा1 मिनट पठन

संकट चतुर्थी व्रत की विधि और कथा क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

कृष्ण पक्ष चतुर्थी (मासिक)। संध्या पूजा, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, कथा श्रवण। चंद्रोदय बाद पारण। कथा: ब्राह्मण→व्रत→संकट दूर। माघ चतुर्थी सर्वश्रेष्ठ।

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विस्तृत उत्तर

संकट चतुर्थी = प्रत्येक मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी — गणेश का विशेष व्रत:

विधि

  1. 1प्रातः स्नान, व्रत संकल्प।
  2. 2संध्या को गणेश पूजा — मिट्टी/धातु गणेश।
  3. 3दूर्वा (21), लाल फूल, मोदक/लड्डू भोग।
  4. 4'ॐ गं गणपतये नमः' 108 जप।
  5. 5गणेश अथर्वशीर्ष या गणेश चालीसा पाठ।
  6. 6संकट चतुर्थी व्रत कथा सुनें।
  7. 7चंद्रोदय बाद चंद्र दर्शन कर व्रत पारण।
  8. 8तिलकुट/तिल गुड़ भोग विशेष।

कथा (संक्षेप): एक निर्धन ब्राह्मण ने संकट चतुर्थी व्रत किया → गणेश प्रसन्न → सभी संकट दूर, धन-सुख प्राप्ति। राजा इंद्रद्युम्न ने भी यह व्रत कर राज्य पुनः प्राप्त किया।

लाभ: सर्व संकट निवारण, ऋण मुक्ति, विघ्न नाश, मनोकामना पूर्ति।

विशेष: माघ मास की संकट चतुर्थी सर्वश्रेष्ठ।

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शास्त्रीय स्रोत
गणेश पुराण, व्रत परंपरा
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