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देवी पूजा📜 संतोषी माता व्रत कथा, लोक परंपरा2 मिनट पठन

संतोषी माता व्रत कथा और पूजा विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

16 शुक्रवार व्रत। भोग: गुड़+चना। खट्टा सर्वथा वर्जित (खाना+खिलाना)। एक समय भोजन। व्रत कथा+आरती। उद्यापन: 8 बालकों को भोजन। कथा: छोटी बहू → माता दर्शन → व्रत → सुख-समृद्धि। पुराणों में स्पष्ट उल्लेख नहीं — लोक परंपरा आधारित।

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विस्तृत उत्तर

संतोषी माता का व्रत और पूजा शुक्रवार को की जाती है:

व्रत कथा (संक्षेप)

एक बुढ़िया थी जिसके सात बेटे और बहुएं थीं। छोटी बहू सबसे गरीब थी। एक बार संतोषी माता ने उसे दर्शन देकर शुक्रवार व्रत करने को कहा। छोटी बहू ने 16 शुक्रवार व्रत किया — गुड़ और चने का भोग लगाया, खट्टा नहीं खाया। माता प्रसन्न हुईं और उसे सुख-समृद्धि प्राप्त हुई। परंतु जब उद्यापन में खट्टा खा लिया गया तो विपत्ति आई। पुनः व्रत और उद्यापन करने पर सब ठीक हुआ।

व्रत विधि

  1. 116 शुक्रवार लगातार व्रत रखें।
  2. 2एक समय भोजन — सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले।
  3. 3भोग: गुड़ और चना (भुना या उबला) — यही मुख्य प्रसाद।
  4. 4खट्टा पदार्थ खाना और खिलाना सर्वथा वर्जित — व्रत काल में।
  5. 5देवी का चित्र/प्रतिमा स्थापित करें।
  6. 6व्रत कथा सुनें/पढ़ें।
  7. 7आरती करें।
  8. 8उद्यापन: 16वें शुक्रवार को या बाद में आठ बालकों को भोजन कराएं — गुड़-चने का प्रसाद बांटें।

ध्यान रखें: संतोषी माता का उल्लेख प्रमुख पुराणों में स्पष्ट नहीं — यह लोक परंपरा और भक्ति आस्था पर आधारित है। कुछ विद्वान इन्हें गणेश जी की पुत्री/शक्ति मानते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
संतोषी माता व्रत कथा, लोक परंपरा
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