विस्तृत उत्तर
देवी को लाल चुनरी चढ़ाने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है और इसके कई शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक आधार हैं:
1लाल रंग = शक्ति और पराक्रम का प्रतीक
शास्त्रों के अनुसार लाल रंग 'रजोगुण' (क्रियाशीलता) का प्रतीक है। मां दुर्गा ने महिषासुर, शुंभ-निशुंभ, रक्तबीज जैसे असुरों का संहार किया — लाल रंग उनकी इस वीरता, अग्नि और शक्ति ऊर्जा को दर्शाता है।
2सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक
भारतीय संस्कृति में लाल रंग सुहाग (वैवाहिक सौभाग्य) का प्रतीक है। देवी को चुनरी चढ़ाना उनसे सौभाग्य, सुखी दांपत्य और परिवार की रक्षा की कामना है। विवाहित महिलाएं देवी को लाल चुनरी चढ़ाकर अपने सुहाग की रक्षा की प्रार्थना करती हैं।
3रक्त (जीवन शक्ति) का प्रतीक
लाल रंग रक्त का प्रतीक है — रक्त = जीवन। देवी जीवनदायिनी शक्ति हैं — लाल चुनरी उनकी इसी जीवनशक्ति का प्रतीकात्मक अर्पण है।
4तंत्र शास्त्र में लाल रंग
तंत्र शास्त्र में शक्ति देवियों (दुर्गा, काली, त्रिपुरसुंदरी) की पूजा में लाल रंग सर्वाधिक शुभ माना गया है। लाल = कुण्डलिनी शक्ति, मूलाधार चक्र का रंग भी लाल है।
5मन्नत और प्रार्थना
भक्त देवी मंदिर में लाल चुनरी बांधकर मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर पुनः लाल चुनरी अर्पित करते हैं। यह परंपरा विशेषकर उत्तर भारत (वैष्णो देवी, चंडी देवी, विंध्यवासिनी) में अत्यंत प्रचलित है।
6देवी का स्वयं का रंग
दुर्गा सप्तशती और पौराणिक वर्णनों में मां दुर्गा को लाल वस्त्र धारिणी बताया गया है। भक्त उन्हें उनका प्रिय वस्त्र (लाल चुनरी) अर्पित करते हैं।
ध्यान रखें: चुनरी नई, शुद्ध और अखंडित होनी चाहिए। पुरानी या फटी चुनरी कदापि न चढ़ाएं।





