विस्तृत उत्तर
शाकम्भरी देवी दुर्गा/पार्वती का वह रूप हैं जो शाक (सब्जी/वनस्पति) से सृष्टि का पोषण करती हैं।
शास्त्रीय आधार
दुर्गा सप्तशती (अध्याय 11) में देवी स्वयं कहती हैं:
ततोऽहमखिलं लोकमात्मदेहसमुद्भवैः। भरिष्यामि सुराः शाकैरावृष्टेः प्राणधारकैः।।
(तब मैं अपने शरीर से उत्पन्न शाक-सब्जियों से समस्त लोक का पोषण करूंगी।)
इसी कारण देवी को 'शाकम्भरी' नाम मिला — 'शाक' + 'अम्भरी' (धारण करने वाली)।
पूजा विधान
- 1नवरात्रि की अष्टमी पर विशेष पूजा।
- 2देवी को विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां, शाक, फल अर्पित करें।
- 3हरे रंग के वस्त्र, हरे पुष्प।
- 4'ॐ शाकम्भर्यै नमः' मंत्र जप।
- 5दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय का पाठ।
प्रमुख मंदिर
- ▸शाकम्भरी देवी मंदिर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
- ▸शाकम्भरी देवी, सांभर (राजस्थान)
विशेष नवरात्रि: शाकम्भरी नवरात्रि (पौष मास) भी मनाई जाती है।
फल: अन्न-धान्य की कमी दूर, कृषि समृद्धि, स्वास्थ्य, पोषण।





