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देवी पूजा📜 दुर्गा सप्तशती (अध्याय 11), देवी भागवत, शाकम्भरी परंपरा1 मिनट पठन

शाकम्भरी देवी की पूजा का क्या विशेष विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

शाकम्भरी = शाक (सब्जी) से पोषण करने वाली। दुर्गा सप्तशती (11): 'शरीर से उत्पन्न शाक से लोक पोषण करूंगी।' विधान: हरी सब्जियां/फल अर्पित, हरे वस्त्र, 'ॐ शाकम्भर्यै नमः'। नवरात्रि अष्टमी + पौष शाकम्भरी नवरात्रि। प्रमुख: सहारनपुर, सांभर मंदिर।

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विस्तृत उत्तर

शाकम्भरी देवी दुर्गा/पार्वती का वह रूप हैं जो शाक (सब्जी/वनस्पति) से सृष्टि का पोषण करती हैं।

शास्त्रीय आधार

दुर्गा सप्तशती (अध्याय 11) में देवी स्वयं कहती हैं:

ततोऽहमखिलं लोकमात्मदेहसमुद्भवैः। भरिष्यामि सुराः शाकैरावृष्टेः प्राणधारकैः।।

(तब मैं अपने शरीर से उत्पन्न शाक-सब्जियों से समस्त लोक का पोषण करूंगी।)

इसी कारण देवी को 'शाकम्भरी' नाम मिला — 'शाक' + 'अम्भरी' (धारण करने वाली)।

पूजा विधान

  1. 1नवरात्रि की अष्टमी पर विशेष पूजा।
  2. 2देवी को विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियां, शाक, फल अर्पित करें।
  3. 3हरे रंग के वस्त्र, हरे पुष्प।
  4. 4'ॐ शाकम्भर्यै नमः' मंत्र जप।
  5. 5दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय का पाठ।

प्रमुख मंदिर

  • शाकम्भरी देवी मंदिर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
  • शाकम्भरी देवी, सांभर (राजस्थान)

विशेष नवरात्रि: शाकम्भरी नवरात्रि (पौष मास) भी मनाई जाती है।

फल: अन्न-धान्य की कमी दूर, कृषि समृद्धि, स्वास्थ्य, पोषण।

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शास्त्रीय स्रोत
दुर्गा सप्तशती (अध्याय 11), देवी भागवत, शाकम्भरी परंपरा
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