विस्तृत उत्तर
देवी पूजा में दीपक (ज्योत) जलाने के लिए तेल का चयन महत्वपूर्ण है:
तेल के प्रकार और उपयुक्तता
1घी (सर्वोत्तम)
- ▸गाय का शुद्ध घी सर्वश्रेष्ठ — सबसे सात्विक।
- ▸सभी देवी-देवताओं की पूजा में मान्य।
- ▸घी का दीपक सकारात्मक ऊर्जा और शुद्धता फैलाता है।
2सरसों का तेल
- ▸देवी दुर्गा और काली माता की पूजा में विशेष रूप से प्रचलित।
- ▸नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है।
- ▸नवरात्रि की अखंड ज्योत में सरसों तेल सर्वाधिक प्रयोग होता है।
3तिल का तेल
- ▸शनिवार, अमावस्या, पितृ पूजा में विशेष।
- ▸काली माता, शनि देव पूजा में उपयुक्त।
4नारियल तेल
- ▸दक्षिण भारत में विशेष प्रचलित।
- ▸लक्ष्मी पूजा में शुभ।
अनुशंसित नहीं
- ▸रिफाइंड/मिलावटी तेल।
- ▸सोयाबीन, पाम या अन्य औद्योगिक तेल।
ज्योत जलाने के नियम
- ▸दीपक मिट्टी या पीतल/कांसे का हो।
- ▸बत्ती रूई की शुद्ध हो।
- ▸ज्योत बुझने न दें — नवरात्रि में अखंड ज्योत।
- ▸दीपक दक्षिण दिशा में न जलाएं (कुछ परंपराओं में)।
- ▸दीपक फूंक मारकर न बुझाएं — हाथ से बुझाएं।
सार: घी = सर्वोत्तम (सात्विक)। सरसों तेल = दुर्गा/काली/नवरात्रि। तिल = अमावस्या/काली। नारियल = लक्ष्मी/दक्षिण भारत।





