ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
माँ चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र, युद्ध मुद्रा और घंटे की ध्वनि का रहस्य !
चंद्रघंटा

माँ चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र

📿 पौराणिक•4 मिनट पढ़ें
अंतिम अपडेट: 26 मार्च 2025
तुरंत उत्तर

शांति और शक्ति का संगम हैं माँ चंद्रघंटा, जिनकी आराधना से मिलता है निर्भय जीवन और अलौकिक ऊर्जा।

ज्ञान-सार

अगर पूरा पोस्ट नहीं पढ़ना चाहते, तो यह सारांश पढ़ें — इससे आपको सटीक जानकारी मिलेगी।

क्लिक करते ही लेख के सबसे महत्वपूर्ण बिंदु एक साफ, छोटे और भरोसेमंद सार में दिखेंगे।

WhatsApp
माँ चंद्रघंटा (तृतीय दुर्गा) - नाम, रूप, कथा, मंदिर और आध्यात्मिक महत्व

माँ चंद्रघंटा (तृतीय दुर्गा)

माँ चंद्रघंटा देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम है। चंद्र का अर्थ है चंद्रमा और घंटे का अर्थ घंटा, अर्थात् जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। माता पार्वती ने जब भगवान शिव से विवाह किया, तो उन्होंने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किया। उसी अर्धचंद्र की आकृति घंटे जैसी दिखने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा गया। इस रूप में माँ का शरीर स्वर्ण की भांति चमकीला बताया गया है। देवी चंद्रघंटा के दस हाथ हैं और वे विभिन्न अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित हैं। उनका वाहन सिंह (कुछ मान्यताओं में बाघ) है, जो उनके वीरत्व का प्रतीक है। नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना की जाती है। शिव-पार्वती विवाह के पश्चात यह उनका रणरंगिणी रूप है, जिसमें वे अत्याचारी असुरों का नाश करने को तत्पर होती हैं।

अवतार की कथा एवं उद्देश्य

पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वर्ग में असुरों के आतंक से त्रस्त देवताओं ने परम शक्ति का आह्वान किया। तब माता दुर्गा ने चंद्रघंटा रूप धारण किया ताकि महिषासुर जैसे दैत्यों का संहार किया जा सके। चंद्रघंटा के इस रौद्र रूप से युद्ध के लिए उद्यत देवी की छवि सामने आती है। एक मान्यता यह है कि नवरात्रि के नौ दिनों के युद्ध में तीसरे दिन देवी ने चंद्रघंटा रूप लेकर देवताओं की सेनाओं का नेतृत्व किया और असुरों के प्रमुख सेनापतियों का नाश किया। महिषासुर द्वारा इंद्र सहित सभी देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लेने की पौराणिक कथा में भी देवी पार्वती ने चंद्रघंटा रूप में युद्ध किया था।

इस रूप में उनके घंटे की भयानक ध्वनि मात्र से कई दैत्य भाग खड़े हुए। उन्होंने सिंह पर आरूढ़ होकर तलवार, त्रिशूल, गदा आदि से असुरों का संहार किया और देवताओं को उनका स्वर्ग लौटा दिया। देवी के इस अवतार का उद्देश्य न्याय और धर्म की स्थापना करना था। उन्होंने अपने दिव्य शक्ति से पापियों का नाश कर धर्म की रक्षा की।

चंद्रघंटा रूप हमें सिखाता है कि ईश्वरीय शक्ति सदैव अन्याय के विरुद्ध और धर्म के पक्ष में खड़ी रहती है।

धार्मिक महत्व एवं स्वरूप

माँ चंद्रघंटा का रूप अत्यंत कल्याणकारी और शांति प्रदान करने वाला माना जाता है, यद्यपि यह उग्र रूप है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि तीसरे नवरात्रि को देवी की आराधना करने से सभी पाप एवं बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में स्वर्गीय सुख का अनुभव मिलता है।

चंद्रघंटा देवी मणिपूर चक्र को सक्रिय करती हैं, जिससे साधक को अलौकिक अनुभव होने लगते हैं। इनके घंटे की ध्वनि से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और आसपास का वातावरण पवित्र हो जाता है। दस भुजाओं वाली इस दिव्य योद्धा देवी के हाथों में खड्ग, त्रिशूल, धनुष-बाण, कमल, जपमाला समेत विभिन्न अस्त्र हैं, और एक हाथ अभय मुद्रा में उठा है जो भक्तों को निर्भय होने का आशीर्वाद देता है।

वे सदैव अपने सिंहवाहन पर सवार रहकर संसार से भय और संकट को मिटाने के लिए तत्पर रहती हैं। उनकी पूजा करने वाले भक्तों में आत्मविश्वास तथा साहस का संचार होता है। देवी चंद्रघंटा को ममता और शक्ति का संगम माना जाता है – उनका एक रूप सौम्य है जो भक्तों पर ममता बरसाता है, तो दूसरा रूप उग्र है जो दुष्टों का विनाश करता है।

प्रमुख मंदिर एवं लोकविश्वास

देवी चंद्रघंटा का एक प्राचीन मंदिर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में स्थित है, जिसे क्षेमेश्वरी देवी मंदिर या स्थानीय उच्चारण में क्षेमा माई का मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर चंद्रघंटा देवी को समर्पित है, जहाँ तीसरे नवरात्रि पर बड़ी संख्या में भक्त जुटते हैं।

ऐसा भी कहा जाता है कि माता पार्वती ने चंद्रघंटा रूप में प्रयागराज में कुछ समय तपस्या की थी, जिससे वहां उनकी शक्ति स्थापित हुई। वर्तमान में देवी चंद्रघंटा के संबंध में यह विश्वास है कि वे सूक्ष्म रूप में स्वर्ग लोक में विराजमान हैं और देवताओं की रक्षा करती हैं।

साथ ही जब भी कोई भक्त न्याय के लिए उनकी शरण आता है, देवी अदृश्य रूप में उसकी रक्षा हेतु उपस्थित होती हैं। बहुत से साधक ध्यान में इनके घंटे की ध्वनि का अनुभव करते हैं, जिसे वे देवी की उपस्थिति का प्रमाण मानते हैं।

माँ चंद्रघंटा की कृपा से भक्त के भीतर से सभी भय, शोक एवं दुष्ट प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। इनको प्रसन्न करने के लिए भक्त तीसरे नवरात्रि को सुवर्ण (स्वर्ण) रंग के वस्त्र धारण करते हैं और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाते हैं, जो उनकी शीतल कृपा का प्रतीक है।

इस प्रकार, चंद्रघंटा देवी अपने उपासकों के भाग्य को उज्ज्वल करती हैं और उन्हें शक्तिशाली एवं निर्भय बनाती हैं।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

पूजा विधि एवं कर्मकांड

अपराध क्षमापन मंत्र पूजा अंत में

पूजा के अंत में बोलें — 'अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर॥' देवी की पूजा में 'परमेश्वरी' बोलें। यह मंत्र पूजा में हुई समस्त भूलों की क्षमा के लिए है।

पूजा विधि एवं कर्मकांड

आचमन का मंत्र क्या है?

आचमन में तीन बार जल ग्रहण करते हुए क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः', 'ॐ माधवाय नमः' बोला जाता है। इससे पूर्व 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' मंत्र से पवित्रीकरण होता है। यह पूजा आरंभ की अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है।

बाल संस्कार

बच्चों का मन पढ़ाई में लगाने के लिए सरस्वती मंत्र

पढ़ाई में मन लगाने के लिए 'ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः' और 'सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि... विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥' सबसे उपयोगी मंत्र हैं। पढ़ाई शुरू करने से पहले नियमित बोलने से एकाग्रता बढ़ती है।

श्राद्ध दर्शन

भागवत पुराण के अनुसार श्राद्ध में मांस चढ़ा सकते हैं?

नहीं, भागवत पुराण श्राद्ध में पशु-हिंसा और मांसाहार का पूर्णतः निषेध करता है। देवर्षि नारद का स्पष्ट उपदेश है कि धर्म का मर्म जानने वाला श्राद्ध में मांस का अर्पण और भक्षण दोनों न करे। पितर सात्त्विक हविष्यान्न अर्थात् दूध, घी, कंद-मूल से ही प्रसन्न होते हैं, मांस से कभी नहीं।

लोक

भागवत पुराण और विष्णु पुराण में तपोलोक की दूरी क्या समान है?

हाँ, दोनों पुराण तपोलोक को जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर बताते हैं।

📚 इसे भी पढ़ें

नील सरस्वती: गुप्त तांत्रिक स्वरूप और शक्ति की कथा !
सरस्वती

नील सरस्वती: गुप्त तांत्रिक स्वरूप और शक्ति की कथा !

माँ बगलामुखी साधना: शत्रु स्तम्भन और 'वाक् सिद्धि' का मंत्र !
बगलामुखी

माँ बगलामुखी साधना: शत्रु स्तम्भन और 'वाक् सिद्धि' का मंत्र !

देवी महामाया: त्रिदेवों की आराध्य और 10 महाविद्याओं की जननी !
महामाया

देवी महामाया: त्रिदेवों की आराध्य और 10 महाविद्याओं की जननी !

ब्रह्माण्ड अस्त्र: ब्रह्मा की पंचमुखी शक्ति और महाविनाश !
ब्रह्माण्ड-अस्त्र

ब्रह्माण्ड अस्त्र: ब्रह्मा की पंचमुखी शक्ति और महाविनाश !

माता अदिति का गूढ़ मंत्र: भाग्य और जीवन दिशा बदलने का उपाय !
अदिति

माता अदिति का गूढ़ मंत्र: भाग्य और जीवन दिशा बदलने का उपाय !

महाविद्या कमला: अष्टलक्ष्मी की जननी और सौम्य शक्ति की कथा !
महाविद्या

महाविद्या कमला: अष्टलक्ष्मी की जननी और सौम्य शक्ति की कथा !

लक्ष्मी जी के 108 नाम: अपार धन और सुख-समृद्धि का 'महामंत्र'!
लक्ष्मी

लक्ष्मी जी के 108 नाम: अपार धन और सुख-समृद्धि का 'महामंत्र'!

महाविद्या एकजटा: श्मशान और उग्र जटा की संपूर्ण गाथा !
महाविद्या

महाविद्या एकजटा: श्मशान और उग्र जटा की संपूर्ण गाथा !

वीरभद्र मंत्र: 7 मिनट में डर, बाधा व नकारात्मकता का नाश !
वीरभद्र

वीरभद्र मंत्र: 7 मिनट में डर, बाधा व नकारात्मकता का नाश !

ब्रह्मशिर अस्त्र: सृष्टि अंत और महाविनाश की प्रलयंकारी कथा !
ब्रह्मशिरा

ब्रह्मशिर अस्त्र: सृष्टि अंत और महाविनाश की प्रलयंकारी कथा !

भगवान शिव का त्रिशूल: रहस्यमयी उत्पत्ति और शक्ति की कथा !
त्रिशूल

भगवान शिव का त्रिशूल: रहस्यमयी उत्पत्ति और शक्ति की कथा !

नील सरस्वती: कालिका की छाया, भय और मोक्ष की गाथा !
महाविद्या

नील सरस्वती: कालिका की छाया, भय और मोक्ष की गाथा !