विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म और विशेषकर शाक्त दर्शन में माँ दुर्गा को परब्रह्म स्वरूपिणी, आद्याशक्ति और अखिल ब्रह्मांड की उत्पत्तिकर्ता के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।
जहाँ एक ओर देवी भागवत पुराण उन्हें सम्पूर्ण ब्रह्मांड की जननी (जगज्जननी) और निर्गुण परब्रह्म की सगुण प्रकृति के रूप में प्रस्तुत करता है, वहीं मार्कण्डेय पुराण उनका वर्णन एक वीर योद्धा, महिषासुरमर्दिनी और धर्म की रक्षिका के रूप में करता है।
देवी उपनिषद (अथर्वशीर्ष), जो कि अथर्ववेद से संबंधित है, महादेवी को सभी शक्तियों का केंद्र मानता है और यह स्पष्ट करता है कि देवी ही एकमात्र परमसत्य (ब्रह्म) हैं; उन्हीं से प्रकृति (पदार्थ) और पुरुष (चेतना) की उत्पत्ति होती है, और वे ही आनंद, निरानन्द, जन्म लेने वाली और अजन्मी सत्ता हैं।
शाक्त परंपरा का यह अकाट्य विश्वास है कि माँ दुर्गा मात्र एक पौराणिक चरित्र या देव-समूह की एक सामान्य देवी नहीं हैं; वे संपूर्ण ब्रह्मांड का मूल कारण, परब्रह्म स्वरूपिणी और शाश्वत सत्य हैं।





