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विस्तृत उत्तर
जनलोक में रहने वाले सिद्ध पुरुष परब्रह्म का गुणगान और वेद-मंत्रों का उद्घोष करते हैं। वे शाश्वत चिंतन में मग्न रहते हैं और ब्रह्मानंद का अनुभव करते हैं। प्रलय के समय वे भगवान विष्णु के योगनिद्रा स्वरूप का निरंतर ध्यान और स्तुति करते हैं। वाराह अवतार के समय जनलोक में स्थित सिद्धों ने भगवान के विराट स्वरूप का ध्यान किया और उनकी स्तुति की।
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