विस्तृत उत्तर
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भारतीय धर्मशास्त्रीय परम्परा में परब्रह्म की उपासना का प्रतिमान है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा के परमात्मा में विलीन होने और ब्रह्मांडीय शक्तियों के साथ तादात्म्य स्थापित करने की एक सूक्ष्म प्रक्रिया है। यह भगवान विष्णु के उस 'अनन्त' स्वरूप को समर्पित है जिसका न कोई आदि है और न अंत।





