विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म की अत्यंत सूक्ष्म कालगणना और उपासना-पद्धति में सूर्य-तत्त्व को संपूर्ण ब्रह्मांड की आत्मा और प्राण-शक्ति माना गया है। इसी परब्रह्म स्वरूप सूर्य की उपासना का सबसे बड़ा पर्व 'रथ सप्तमी' है, जो माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। यह तिथि मात्र एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि मनुष्य की आध्यात्मिक चेतना के ऊपर उठने और शारीरिक शुद्धि का परम अवसर है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन किए गए स्नान, दान और व्रत का अक्षय पुण्य किसी 'सूर्य-ग्रहण' के समय तीर्थों में किए गए अनुष्ठानों के बिल्कुल बराबर माना जाता है।




