विस्तृत उत्तर
भगवान सूर्य के 108 नामों का जप 'सूर्य अष्टोत्तर शतनामावली' के रूप में जाना जाता है। सूर्य को नवग्रहों का राजा माना जाता है। इनके 108 नामों के जप से स्वास्थ्य, तेज, आत्मविश्वास और नेत्र-संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है।
जप की विधि इस प्रकार है — रविवार का दिन सूर्यदेव का विशेष दिन है। सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें, लाल या नारंगी वस्त्र पहनें। तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद लाल चंदन की माला से जप करें।
ॐ मित्राय नमः', 'ॐ रवये नमः', 'ॐ सूर्याय नमः', 'ॐ भानवे नमः', 'ॐ खगाय नमः', 'ॐ पूष्णे नमः', 'ॐ हिरण्यगर्भाय नमः', 'ॐ मरीचये नमः', 'ॐ आदित्याय नमः', 'ॐ सवित्रे नमः', 'ॐ अर्काय नमः', 'ॐ भास्कराय नमः' — ये 12 प्रमुख नाम आदित्य हृदय स्तोत्र में भी संकलित हैं और विशेष शक्तिशाली माने जाते हैं।
प्रत्येक रविवार प्रातः 108 बार जप करने से 40 दिनों में सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।





