विस्तृत उत्तर
गणेश जी के 108 नामों की नामावली 'गणेश अष्टोत्तर शतनामावली' के नाम से प्रसिद्ध है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं — उनके 108 नामों का जप सभी कार्यों की सिद्धि, बुद्धि-विवेक और समृद्धि के लिए किया जाता है।
जप की विधि इस प्रकार है — प्रातः या मध्याह्न स्नान करके गणेश जी के सामने बैठें। लाल या पीले वस्त्र पहनें। दूर्वा (दूब), मोदक, लड्डू और लाल पुष्प अर्पित करें। लाल चंदन का तिलक लगाएं। लाल रंग की माला अथवा मूंगे की माला से जप करें। 'ॐ विनायकाय नमः', 'ॐ विघ्नराजाय नमः', 'ॐ गणाधिपाय नमः' जैसे क्रम में प्रत्येक नाम बोलते हुए 108 नाम पूरे करें।
बुधवार का दिन गणेश जी का विशेष दिन माना जाता है। गणेश चतुर्थी, संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी को यह जप करना विशेष फलदायक है। जप के अंत में गणेश जी से अपनी मनोकामना प्रार्थना करें और मोदक या लड्डू का प्रसाद बाँटें।
गणेश जी के 108 नामों में 'गणाधिपाय', 'विघ्नहर्त्रे', 'ऋद्धिप्रदाय', 'बुद्धिनाथाय', 'सिद्धिविनायकाय' आदि नाम विशेष रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं।





