विस्तृत उत्तर
माँ लक्ष्मी के 108 नामों की नामावली 'श्री महालक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली' के नाम से जानी जाती है। यह धन, समृद्धि, सौभाग्य और सुख की प्राप्ति के लिए जपी जाती है।
जप विधि इस प्रकार है — शुक्रवार का दिन विशेष उत्तम है, क्योंकि यह दिन माँ लक्ष्मी को समर्पित है। स्नान करके पीले या लाल वस्त्र पहनें। माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने कमल पुष्प, गुलाब, लाल फूल और पान के पत्ते अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं। कमलगट्टे की माला से जप करें। 'ॐ प्रकृत्यै नमः', 'ॐ विकृत्यै नमः', 'ॐ विद्यायै नमः', 'ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमः' आदि क्रम में 108 नाम पूरे करें।
लक्ष्मी जी का बीज मंत्र 'ॐ श्रीं' है। 108 नामों के जप से पहले या बाद में इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना जप को और प्रभावशाली बनाता है।
दीपावली, शरद पूर्णिमा और शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को यह जप विशेष लाभदायक माना जाता है। जप के बाद खीर, मिठाई या मेवे का प्रसाद चढ़ाएं और उसे परिवार में बाँटें।





