षोडशोपचार पूजामकर संक्रांति पर सूर्य पूजा की षोडशोपचार विधि क्या है?सूर्य षोडशोपचार पूजा के 16 चरण: ध्यान → आसन → पाद्य-अर्घ्य → आचमन-मधुपर्क → स्नान → वस्त्र → यज्ञोपवीत → गंध-कुमकुम → पुष्प-दूर्वा → धूप → दीप → नैवेद्य (खिचड़ी) → ताम्बूल-दक्षिणा → आरती → प्रदक्षिणा → पुष्पांजलि-क्षमा।#षोडशोपचार#16 उपचार#सूर्य पूजा
परिचयरथ सप्तमी क्या है और यह कब मनाई जाती है?माघ महीने के शुक्ल पक्ष की 7वीं तिथि (सप्तमी) को रथ सप्तमी मनाई जाती है। यह भगवान सूर्य देव की पूजा का सबसे बड़ा और पवित्र दिन है, जिसका पुण्य सूर्य-ग्रहण के बराबर होता है।
मंत्र जप एवं साधनासूर्य के 108 नामों का जप कैसे करेंरविवार को सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद लाल माला से 'ॐ [नाम] नमः' क्रम में 108 नाम जपें। लाल वस्त्र पहनें। मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क, भास्कर ये 12 नाम सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं।#सूर्य 108 नाम#जप विधि#सूर्य पूजा
त्योहार पूजाबैसाखी पर पूजा का क्या विधान है?बैसाखी: वैशाख संक्रांति (13-14 अप्रैल)। विधान: पवित्र स्नान → सूर्य अर्घ्य ('ॐ सूर्याय नमः') → मन्दिर दर्शन → नई फसल (गेहूँ) भगवान को अर्पण → अन्नदान-वस्त्रदान → सामूहिक भोज। सौर नववर्ष, फसल कृतज्ञता पर्व।#बैसाखी#वैशाख#सूर्य पूजा
त्योहार पूजापोंगल त्योहार में सूर्य पूजा कैसे करें?पोंगल सूर्य पूजा: थाई पोंगल (मकर संक्रांति)। विधि: आँगन में कोलम → मिट्टी बर्तन में नया चावल+दूध+गुड़ उबालें → उफनने पर 'पोंगलो पोंगल!' → सूर्य को भोग ('ॐ सूर्याय नमः') → गन्ना-हल्दी-नारियल अर्पण → प्रसाद वितरण। कृषि-कृतज्ञता पर्व।#पोंगल#सूर्य पूजा#तमिलनाडु
पूजा विधिरविवार को सूर्य देव की पूजा कैसे करें?सूर्योदय पर तांबे लोटे से अर्घ्य (जल+रोली+लाल फूल), 'ॐ सूर्याय नमः' 11 बार, आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य नमस्कार। गुड़+गेहूँ दान। खड़े होकर अर्घ्य। लाभ: स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, सरकारी सफलता।#रविवार#सूर्य पूजा#अर्घ्य