विस्तृत उत्तर
पोंगल दक्षिण भारत (विशेषतः तमिलनाडु) का प्रमुख फसल उत्सव है। यह मकर संक्रांति (थाई मास = जनवरी-फरवरी) के समय मनाया जाता है और मुख्यतः सूर्य देव की उपासना का पर्व है।
पोंगल चार दिवसीय पर्व
- 1भोगी पोंगल (दिन 1): पुरानी-बेकार वस्तुओं को जलाना (नवीनता का प्रतीक)।
- 2थाई/सूर्य पोंगल (दिन 2 — मुख्य): सूर्य पूजा।
- 3मट्टू पोंगल (दिन 3): गोपूजा (गाय-बैल पूजा)।
- 4कानुम पोंगल (दिन 4): परिवार मिलन।
सूर्य पूजा विधि (थाई पोंगल)
- 1प्रातःकाल: स्नान करके नये वस्त्र धारण करें। घर के आँगन में कोलम (रंगोली) बनाएँ।
- 1पोंगल (चावल) पकाना: खुले आँगन में सूर्य की ओर मुख करके मिट्टी के बर्तन में नया चावल, दूध, गुड़ उबालें। जब दूध उफनकर बाहर आए — 'पोंगलो पोंगल!' का जयघोष करें (पोंगल = उबलना = समृद्धि का प्रतीक)।
- 1सूर्य अर्घ्य: तैयार पोंगल (मीठे चावल) का भोग सूर्य देव को अर्पित करें। 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र।
- 1हल्दी बँधा गन्ना: गन्ने, हल्दी गाँठ, केला, नारियल सूर्य को अर्पित करें।
- 1कृतज्ञता प्रार्थना: सूर्य देव से प्रार्थना — अच्छी फसल, स्वास्थ्य, समृद्धि हेतु धन्यवाद और आगामी वर्ष हेतु कृपा कामना।
- 1प्रसाद: पोंगल (मीठे चावल), सक्कराई पोंगल, वेन पोंगल सबको बाँटें।
विशेष: पोंगल तमिल नववर्ष/किसान पर्व है। उत्तर भारत की मकर संक्रांति का ही दक्षिण भारतीय रूप है। सूर्य का मकर राशि प्रवेश = उत्तरायण आरम्भ = शुभकाल।





