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त्योहार पूजा📜 स्कन्द पुराण, लोक परम्परा1 मिनट पठन

होलिका दहन के बाद भस्म को माथे पर लगाने का क्या विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

होलिका भस्म: शुद्धि (पवित्र अग्नि), बुराई नाश प्रतीक, शिव सम्बंध, औषधिमय। प्रातः ठंडी भस्म→माथे→'ॐ'। शुद्ध (प्लास्टिक रहित)।

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विस्तृत उत्तर

होलिका भस्म माथे पर:

  1. 1शुद्धि: पवित्र अग्नि (बुराई जलाने वाली) की भस्म = शुद्धतम। माथे = शरीर-मन शुद्धि।
  2. 2बुराई नाश: होलिका जली → भस्म = 'मेरी बुराई भी भस्म हो।'
  3. 3शिव सम्बंध: भस्म = शिव प्रिय (भस्मधारी)।
  4. 4औषधिमय (लोक): गोबर + समिधा राख = त्वचा/नजर निवारण।

विधि: अगली प्रातः → ठंडी भस्म एकत्रित → माथे तिलक → 'ॐ'। शुद्ध भस्म (प्लास्टिक रहित)।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, लोक परम्परा
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