विस्तृत उत्तर
कंस वध = शाश्वत सन्देश:
- 1कंस = अहंकार/भय। कृष्ण = आत्मा/सत्य। कंस वध = अहंकार अंत = आत्मज्ञान।
- 2भय मुक्ति: कंस = भय में जीने वाला → क्रूर बना। भय = सबसे बड़ा शत्रु।
- 3गीता (4.7-8): 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति...' धर्म हानि = अवतार।
- 4अत्याचार अंत: अत्याचार कितना भी शक्तिशाली = अंत निश्चित।
- 5प्रेम > भय: कृष्ण = गोकुल प्रेम। कंस = भय। प्रेम ने भय पराजित।
- 6आंतरिक कंस: लोभ-मोह-क्रोध-अहंकार = कृष्ण (आत्मा/विवेक) से नष्ट।





