विस्तृत उत्तर
गोवर्धन पूजा (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा = दीपावली अगला दिन) में अन्नकूट:
छप्पन भोग (56 व्यंजन) = आदर्श
- 1छप्पन भोग कथा: भागवत: माता यशोदा बालकृष्ण को दिन में 8 बार भोजन कराती थीं। जब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया = 7 दिन तक भोजन नहीं खाया = 8 × 7 = 56 भोजन छूटे = इन्द्र पराजय बाद ब्रजवासियों ने 56 व्यंजन = 'छप्पन भोग' अर्पित।
- 156 व्यंजन सूची (परम्परागत): भात, दाल, चटनी, अचार, रायता, कढ़ी, पूड़ी, कचौड़ी, पकौड़ी, खीर, हलवा, लड्डू, बर्फी, पेड़ा, मालपुआ, इमरती, दूध, मक्खन, दही, घी, शक्कर, शहद, फल (अनेक प्रकार), मेवे, शाक (अनेक प्रकार) आदि।
व्यावहारिक
- ▸56 व्यंजन = आदर्श (मंदिरों/सम्प्रदायों में)।
- ▸गृहस्थ = यथाशक्ति 21, 32, 56 या जितने बना सकें।
- ▸भावना > संख्या: 5 व्यंजन भी श्रद्धापूर्वक = 56 के बराबर।
विधि: गोबर का गोवर्धन (पर्वत आकार) बनाएँ → फूल-पत्तों से सजाएँ → अन्नकूट (सभी व्यंजन) भोग → कृष्ण पूजा → परिक्रमा → प्रसाद वितरण।
वल्लभ सम्प्रदाय: श्रीनाथजी (नाथद्वारा) = सबसे भव्य अन्नकूट = हजारों व्यंजन।





