विस्तृत उत्तर
अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) पर सोना खरीदने का आधार:
- 1'अक्षय' = कभी क्षय नहीं: इस तिथि पर किया गया कोई भी शुभ कर्म = अक्षय (कभी समाप्त नहीं होने वाला) फल देता है। सोना खरीदना = 'अक्षय धन' = कभी न समाप्त होने वाली समृद्धि।
- 1सोना = शाश्वत धातु: सोना = अविनाशी (जंग नहीं लगता, खराब नहीं होता)। अक्षय + अविनाशी = शाश्वत समृद्धि।
- 1लक्ष्मी कृपा: इस दिन लक्ष्मी-नारायण पूजन का विधान। सोना = लक्ष्मी प्रतीक। खरीदना = लक्ष्मी आवाहन।
- 1अक्षय पात्र कथा: इसी दिन सूर्य देव ने पाण्डवों को 'अक्षय पात्र' (कभी खाली न होने वाला बर्तन) दिया। अक्षय पात्र = अक्षय सम्पत्ति।
- 1परशुराम जयंती: इसी दिन भगवान परशुराम जन्म = विष्णु अवतार।
शास्त्रीय सत्य: शास्त्रों में मूलतः 'अक्षय दान' (दान जो अक्षय फल दे) का विधान है — सोना खरीदना नहीं। दान = पुण्य। किन्तु लोक परम्परा ने 'अक्षय' = सोना खरीदना बनाया। दान > खरीदारी — अक्षय तृतीया = अन्नदान, जलदान, छाया (छत्र) दान = सर्वोत्तम।
विशेष: यह तिथि = अबूझ मुहूर्त (कोई विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं) = कभी भी शुभ कार्य।





