विस्तृत उत्तर
यमदीपदान = धनतेरस/दीपावली सायंकाल = यमराज हेतु दीपक:
कथा: राजकुमार को सर्प दंश से मृत्यु भविष्यवाणी। पत्नी ने रात भर दीपक जलाए + सोने-चाँदी सजाया → यमदूत दीपकों से विमोहित → पति बचा।
विधि: सायंकाल → सरसों/तिल तेल दीपक → 4 बत्ती → दक्षिण दिशा (यम दिशा) → घर बाहर मुख्य द्वार → मंत्र: 'मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम।'
उद्देश्य: अकाल मृत्यु रक्षा। दीपक रात भर जले।





