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त्योहार पूजा📜 भागवत पुराण (दशम स्कन्ध, अध्याय 3), विष्णु पुराण2 मिनट पठन

जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में पूजा क्यों करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

मध्यरात्रि पूजा क्योंकि: कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी) में हुआ (भागवत 10.3)। अभिजित मुहूर्त। जागरण तप। अंधकार (अज्ञान) में प्रकाश (कृष्ण) का उदय — अवतार का मूल सन्देश।

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विस्तृत उत्तर

जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में पूजा करने का सीधा कारण श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में होना है।

भागवत पुराण के अनुसार

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, मध्यरात्रि (निशीथ काल) में मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के पुत्र रूप में जन्म लिया। जन्म के समय — घनघोर वर्षा, अंधकार, शंख-भेरी की दिव्य ध्वनि, और चतुर्भुज विष्णु रूप में भगवान प्रकट हुए।

मध्यरात्रि पूजा के कारण

  1. 1जन्म तिथि-काल: जिस ठीक समय भगवान प्रकट हुए, उसी समय उनका स्मरण और पूजन — यह सबसे प्रमाणिक कारण है। मध्यरात्रि = प्रकटोत्सव का क्षण।
  1. 1अभिजित मुहूर्त: मध्यरात्रि के आसपास 'अभिजित मुहूर्त' होता है जो अत्यंत शुभ माना जाता है। कृष्ण जन्म इसी मुहूर्त में हुआ।
  1. 1जागरण का पुण्य: मध्यरात्रि तक जागकर भगवान का स्मरण = जागरण तप। यह एकादशी जागरण के समान पुण्यदायी माना गया है।
  1. 1अंधकार से प्रकाश: मध्यरात्रि = अज्ञान/अंधकार का चरम। भगवान का जन्म = ज्ञान/प्रकाश का उदय। सबसे गहन अंधकार में प्रकाश प्रकट होना — यही कृष्णावतार का सन्देश है।
  1. 1कंस का भय: कंस ने कारागार में रात्रि में कड़ी पहरेदारी रखी थी। भगवान ने इसी कठिनतम समय में प्रकट होकर दिखाया कि ईश्वरीय शक्ति के आगे कोई बाधा नहीं टिकती।

विशेष: मथुरा, वृन्दावन, द्वारका, उडुपी और इस्कॉन मंदिरों में मध्यरात्रि पूजा भव्य रूप से मनाई जाती है।

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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण (दशम स्कन्ध, अध्याय 3), विष्णु पुराण
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