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त्योहार पूजा📜 भागवत पुराण, नारद पुराण, लोक परम्परा2 मिनट पठन

होली पर होलिका दहन में परिक्रमा क्यों करते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

होलिका परिक्रमा: प्रह्लाद भक्ति का सम्मान, अग्नि साक्षी रखकर बुराई त्याग संकल्प, पाप दहन, नवीन फसल अर्पण (कृतज्ञता), रक्षा कामना, सामुदायिक एकता। 3/5/7 दक्षिणावर्त परिक्रमा। जल-अक्षत-पुष्प अर्पित।

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विस्तृत उत्तर

होलिका दहन में अग्नि की परिक्रमा करना एक महत्वपूर्ण धार्मिक कृत्य है जिसके पीछे गहन अर्थ हैं:

1. प्रह्लाद स्मरण: परिक्रमा = भक्त प्रह्लाद की भक्ति का सम्मान। जैसे प्रह्लाद ने अग्नि में भी विष्णु का स्मरण नहीं छोड़ा, वैसे ही भक्त अग्नि की परिक्रमा करते हुए ईश्वर का स्मरण करते हैं।

2. अग्नि = साक्षी देवता: अग्नि को सबसे पवित्र साक्षी माना गया है। अग्नि की परिक्रमा = अग्नि देवता को साक्षी रखकर बुराइयों के त्याग का संकल्प।

3. पाप दहन: मान्यता है कि होलिका की अग्नि में परिक्रमा करने से व्यक्ति के पापों का दहन होता है — जैसे होलिका (बुराई) जली, वैसे ही हमारी बुराइयाँ भी जलें।

4. नवीन फसल अर्पण: परिक्रमा के दौरान नई फसल (गेहूँ, जौ) अग्नि में अर्पित की जाती है — यह अग्नि देवता और प्रकृति को कृतज्ञता का प्रतीक है।

5. रक्षा कामना: परिक्रमा करते हुए प्रार्थना की जाती है कि जैसे अग्नि ने प्रह्लाद की रक्षा की, वैसे ही हमारी और हमारे परिवार की रक्षा हो।

6. समुदायिक एकता: सम्पूर्ण समुदाय एक साथ अग्नि की परिक्रमा करता है — यह सामाजिक एकता और सामूहिक प्रार्थना का प्रतीक है।

परिक्रमा का नियम: सामान्यतः 3, 5 या 7 परिक्रमा। दक्षिणावर्त (clockwise) दिशा में। परिक्रमा करते समय जल, अक्षत, पुष्प अर्पित करते जाएँ।

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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण, नारद पुराण, लोक परम्परा
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