विस्तृत उत्तर
नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) को 'छोटी दिवाली' भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से पूर्व तेल स्नान (अभ्यंग स्नान) का विशेष विधान है।
पौराणिक कारण
1. नरकासुर वध: भागवत पुराण के अनुसार प्रागज्योतिषपुर के दैत्य राजा नरकासुर ने 16,100 राजकन्याओं को बंदी बनाया था। भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया। वध के बाद कृष्ण ने प्रातःकाल तेल और उबटन से अभ्यंग स्नान किया — रक्त और युद्ध की अशुद्धि दूर करने के लिए। इसी स्मृति में इस दिन तेल स्नान किया जाता है।
2. नरक से मुक्ति: मान्यता है कि इस दिन अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को नरक यातना नहीं भोगनी पड़ती। 'नरक' = अज्ञान/पाप, 'स्नान' = शुद्धि — अर्थात पापों से मुक्ति।
अभ्यंग स्नान की विधि
- 1समय: ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) — चतुर्दशी तिथि में।
- 2तेल मालिश: सरसों या तिल के तेल से सम्पूर्ण शरीर की मालिश।
- 3उबटन: हल्दी, बेसन, चन्दन का उबटन लगाएँ।
- 4स्नान: गर्म जल से स्नान। जल में गंगाजल और तिल मिलाना शुभ।
- 5मंत्र: स्नान करते समय — 'यमलोकमार्गणः प्रीत्यर्थं अभ्यंगस्नानमहं करिष्ये।'
- 6दीपक: स्नान के बाद अपामार्ग (चिरचिटा/लटजीरा) की डंडी से दीपक जलाएँ।
स्वास्थ्य लाभ: शीत ऋतु आरम्भ होने से पहले तेल मालिश शरीर को गर्मी देती है, रक्तसंचार बढ़ाती है, त्वचा को कोमल बनाती है।
विशेष: महाराष्ट्र में इस दिन उटणे (उबटन) से स्नान की विशेष परम्परा है। दक्षिण भारत में इसे 'नरक चतुर्दशी' के नाम से मनाते हैं।





