विस्तृत उत्तर
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त अत्यंत महत्वपूर्ण है। गलत समय पर पूजा का वांछित फल नहीं मिलता।
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त के नियम
1प्रदोष काल (सर्वश्रेष्ठ)
सूर्यास्त के बाद के पहले 2 घण्टे 24 मिनट को 'प्रदोष काल' कहते हैं। लक्ष्मी पूजा इसी काल में करनी चाहिए। यह सर्वाधिक शुभ माना गया है।
2स्थिर लग्न
वृषभ लग्न (स्थिर राशि) में लक्ष्मी पूजा करने से लक्ष्मी 'स्थिर' रहती हैं — अर्थात धन-सम्पत्ति टिकाऊ होती है। सिंह लग्न भी स्थिर माना जाता है। चर लग्न (मेष, कर्क, तुला, मकर) में पूजा से लक्ष्मी 'चंचल' रहती हैं।
3अमावस्या तिथि
लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या को ही होनी चाहिए। यदि अमावस्या दो दिन हो, तो जिस दिन प्रदोष काल में अमावस्या हो, उस दिन पूजा करें।
4निशीथ काल
मध्यरात्रि का समय 'निशीथ काल' कहलाता है। कुछ परम्पराओं में निशीथ काल में भी लक्ष्मी पूजा का विधान है, किन्तु प्रदोष काल सर्वमान्य है।
5महानिशीथ काल
तांत्रिक परम्परा में महानिशीथ काल (मध्यरात्रि 12 बजे के आसपास) में महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती पूजा का विधान है। यह सामान्य गृहस्थ के लिए नहीं है।
व्यावहारिक सुझाव
- ▸प्रदोष काल से पहले ही पूजा की सम्पूर्ण तैयारी कर लें।
- ▸लक्ष्मी पूजा का मुख्य अंश (आवाहन, षोडशोपचार) प्रदोष काल/वृषभ लग्न में करें।
- ▸शेष पूजा (आरती, स्तोत्र पाठ) मुहूर्त के बाद भी जारी रख सकते हैं।
- ▸प्रत्येक वर्ष मुहूर्त का समय भिन्न होता है — पंचांग या विश्वसनीय ज्योतिष वेबसाइट से सटीक समय देखें।





