विस्तृत उत्तर
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सुहागिन स्त्रियों द्वारा पति की दीर्घायु और सौभाग्य हेतु रखा जाने वाला निर्जला व्रत है।
करवा चौथ पूजा विधि
1. पूर्व तैयारी: सरगी (सास द्वारा दी गई मिठाई-फल-फेनी) ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) में ग्रहण करें। इसके बाद निर्जला व्रत आरम्भ।
2. दिनभर निर्जला व्रत: जल की एक बूँद भी नहीं पीनी चाहिए।
1संध्या पूजा
- ▸दीवार या ज़मीन पर गेरू/मिट्टी से करवा चौथ की छवि बनाएँ (चलनी, चाँद, करवा)।
- ▸मिट्टी या पीतल का करवा (छोटा लोटा) जल से भरकर ढक्कन लगाएँ।
- ▸गौर-पार्वती (शिव-पार्वती) की प्रतिमा या चित्र रखें।
- ▸रोली, चावल, फूल, धूप, दीपक से पूजन।
4. करवा चौथ कथा: सुहागिन स्त्रियाँ एकत्र होकर करवा चौथ व्रत कथा सुनें। कथा में वीरवती (या ऐसी ही पतिव्रता नारी) का वर्णन होता है।
2चन्द्र दर्शन और अर्घ्य
- ▸चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करें।
- ▸चन्द्रमा दिखने पर छलनी (चालनी) से पहले चन्द्रमा को देखें, फिर छलनी से पति का मुख देखें।
- ▸चन्द्रमा को जल और अक्षत का अर्घ्य दें।
- ▸मंत्र: 'ॐ चन्द्राय नमः।'
3पति द्वारा व्रत खोलना
- ▸पति पत्नी को जल और मिठाई खिलाकर व्रत खोलें।
- ▸पत्नी पति के चरण स्पर्श करे।
- ▸करवा (लोटा) सास/ब्राह्मणी को दान करें।
विशेष: करवा चौथ उत्तर भारत (विशेषतः पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश) में अत्यंत लोकप्रिय है। कुछ क्षेत्रों में पुरुष भी पत्नी के लिए व्रत रखते हैं।





