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त्योहार पूजा📜 स्कन्द पुराण, लोक परम्परा, पुरातन कथा2 मिनट पठन

दीपावली की रात जुआ खेलने की परंपरा कहां से आई?

संक्षिप्त उत्तर

जुआ परम्परा: शिव-पार्वती चौसर कथा (अप्रामाणिक/लोक)। शास्त्रीय सत्य: जुआ=महापाप (मनुस्मृति), महाभारत=जुआ दुष्परिणाम, लक्ष्मी=पवित्रता (जुआ से दूर)। दीपावली जुआ = कुप्रथा, शास्त्रीय विधान नहीं।

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विस्तृत उत्तर

दीपावली पर जुआ खेलने की परम्परा का आधार एक पौराणिक कथा है, किन्तु यह शास्त्रसम्मत अनुष्ठान नहीं है:

पौराणिक कथा

एक कथा के अनुसार दीपावली की रात भगवान शिव और माता पार्वती ने पासा (चौसर) खेला। शिव ने पार्वती से कहा — 'इस रात जो जुआ खेलेगा, उसे वर्ष भर लक्ष्मी की कृपा रहेगी।' इसी कथा को आधार बनाकर कुछ क्षेत्रों में दीपावली पर जुआ खेलने की प्रथा चली।

शास्त्रीय सत्य

  • यह कथा मुख्य पुराणों में स्पष्ट रूप से नहीं मिलती — लोक परम्परा/अप्रामाणिक स्रोत।
  • जुआ = महापाप: मनुस्मृति, भगवद्गीता, और अधिकांश धर्मग्रंथ जुआ को 'द्यूत' = पाप कर्म मानते हैं। महाभारत = जुआ के दुष्परिणामों की सबसे बड़ी कथा (द्रौपदी चीरहरण)।
  • लक्ष्मी = जुआ नहीं: लक्ष्मी = पवित्रता, परिश्रम, सात्त्विकता। जुआ = लोभ, मोह, अधर्म। लक्ष्मी जुआ खेलने वालों से प्रसन्न नहीं, दूर होती हैं।

निष्कर्ष: दीपावली पर जुआ = सर्वथा अशुभ और अधार्मिक। यह कुप्रथा है, शास्त्रीय विधान नहीं। दीपावली = लक्ष्मी पूजा, दीपदान, भजन, परिवार मिलन — यही सच्ची दीपावली।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, लोक परम्परा, पुरातन कथा
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