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त्योहार पूजा📜 स्कन्द पुराण, धर्मसिंधु, ज्योतिष, लोक परम्परा1 मिनट पठन

दीपावली पर दीपों की संख्या विषम क्यों होनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

विषम संख्या: शास्त्र विधान (स्कन्द पुराण), विषम=अखण्ड/ब्रह्म (अद्वैत), ज्योतिष (विषम=शुभ, सम=अशुभ/मृत्यु), प्रकृति (पंचतत्व=5, सप्तऋषि=7, नवग्रह=9)। दीप: 7/11/13/21। दान भी विषम (1/5/11/21/51)।

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विस्तृत उत्तर

दीपावली पर दीपकों की विषम संख्या (odd number) का विधान:

  1. 1शास्त्रीय विधान: स्कन्द पुराण: दीपावली पर 7, 11, 13, 21 या अधिक विषम संख्या में दीपक जलाना शुभ। सम (even) संख्या = अशुभ/अपूर्ण।
  1. 1विषम = ब्रह्म/देवता: विषम संख्या = 'अविभाज्य' (indivisible) = ब्रह्म (अखण्ड) का प्रतीक। सम = विभाज्य = द्वैत/अपूर्ण। विषम = अद्वैत/पूर्ण।
  1. 1ज्योतिषीय: शुभ कार्यों में विषम संख्या (1, 3, 5, 7, 11...) = शुभ। सम (2, 4, 6...) = अशुभ/मृत्यु सम्बद्ध। मृतक हेतु सम संख्या (12, 13वीं)।
  1. 1प्रकृति नियम: प्राकृतिक संरचनाओं में विषमता = सुन्दर (golden ratio, Fibonacci sequence)। पंचतत्व = 5 (विषम)। सप्तऋषि = 7। नवग्रह = 9।
  1. 1दान नियम: दीपदान, द्रव्य दान, दक्षिणा = विषम संख्या (1, 5, 11, 21, 51, 101...)।

सामान्य विषम संख्या: 7 (सप्तऋषि), 11 (एकादश रुद्र), 13 (परम्परा), 21 (इक्कीस), 108 (माला = अर्ध-विषम)।

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शास्त्रीय स्रोत
स्कन्द पुराण, धर्मसिंधु, ज्योतिष, लोक परम्परा
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