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त्योहार पूजा📜 पद्म पुराण, विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण1 मिनट पठन

तुलसी विवाह के बाद शादी विवाह शुरू होने का क्या कारण है?

संक्षिप्त उत्तर

तुलसी विवाह बाद शादी: विष्णु जागरण (दैवी आशीर्वाद उपलब्ध), चातुर्मास समाप्ति (4 माह वर्जन हटा), प्रथम दैवी विवाह (तुलसी+शालिग्राम), ऋतु अनुकूल (यात्रा सुगम), शुभ मुहूर्त प्रचुर (मार्गशीर्ष-माघ)।

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विस्तृत उत्तर

तुलसी विवाह (कार्तिक शुक्ल एकादशी/द्वादशी) = विवाह मुहूर्त आरम्भ:

  1. 1विष्णु जागरण: तुलसी विवाह = देवउठनी एकादशी = भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। विष्णु जागे = देवता सक्रिय = शुभ कार्यों में दैवी आशीर्वाद पुनः उपलब्ध।
  1. 1चातुर्मास समाप्ति: चातुर्मास (4 माह विवाह वर्जित) = समाप्त। तुलसी विवाह = प्रथम विवाह = शेष विवाहों का शुभारम्भ।
  1. 1'विवाह' = शुभता: तुलसी (लक्ष्मी अंश) + शालिग्राम (विष्णु) विवाह = सर्वप्रथम दैवी विवाह → मानव विवाहों का मार्ग खुला।
  1. 1ऋतु अनुकूल: कार्तिक-मार्गशीर्ष (नवम्बर-जनवरी) = शरद-शीत ऋतु = यात्रा सुगम (वर्षा समाप्त), मौसम सुहावना = विवाह हेतु उत्तम।
  1. 1शुभ नक्षत्र: देवउठनी के बाद = शुभ मुहूर्त प्रचुर। मार्गशीर्ष-पौष-माघ = विवाह मुहूर्तों का चरम काल।

विधि: तुलसी को दुल्हन सजाएँ → शालिग्राम = दूल्हा → सप्तपदी (7 फेरे) → मंगलसूत्र → सिन्दूरदान → आरती। यह पूर्ण विवाह विधि होती है।

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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण
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